वितरण के लिए आई अध्ययन सामग्री को निकलवाते शिक्षा विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। साक्षर भारत मिशन का यह हाल देखिए। पूरे साल किताबों के लिए भटकते वयस्क साक्षरों की विभाग ने सुध नहीं ली और अब जब परीक्षा नजदीक आ गई है तो आनन-फानन में किताबें बांटी जा रही हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही का यह आलम तब है, जबकि वितरण के लिए यह किताबें जिले में महीनों पहले आ चुकी थीं। शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। लोग इसे दबी जुबान में सत्ता परिवर्तन का असर भी बता रहे हैं।
केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली साक्षर भारत मिशन योजना का मकसद उन वयस्कों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना है, जो किन्हीं कारणों से अब तक पढ़ाई नहीं कर पाए थे।
प्रत्येक गांव में लोक शिक्षा केंद्र स्थापित कर इनके पंजीयन भी किए गए हैं। पूरे साल इनकी पढ़ाई बिना किताब-कॉपी के ही चलती रही। प्रेरक बार-बार विभाग से अध्ययन सामग्री वितरण की मांग करते रहे, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अब अप्रैल में वयस्कों की परीक्षा प्रस्तावित है। परीक्षा नजदीक देख विभाग ने शुक्रवार को विकास भवन के एक कमरे में महीनों से धूल फांकती सत्र 2016-17 की किताबों को बाहर निकलवाया। अब इसे ब्लाकों के माध्यम से वितरण के लिए गांवों में भेजा जा रहा है। एक माह बाद होने वाली परीक्षा के लिए यह सामग्री कितनी उपयोगी होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है।
शिक्षा प्रेरक संघ के जिलाध्यक्ष विकास चंद्र कौशिक ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विभाग की ऐसी ही लापरवाही के चलते साक्षर भारत मिशन का बुरा हाल है। कभी अध्ययन सामग्री नहीं दी जाती तो कभी मानदेय समय पर नहीं मिलता। अंतिम समय में शैक्षिक सत्र 2016-17 की अध्ययन सामग्री देकर विभाग सिर्फ अपना पल्ला झाड़ रहा है। इस समय वितरण का कोई मतलब नहीं होगा। उधर, इस संबंध में बीएसए अरविंद कुमार पाठक का कहना था कि विकास भवन के एक कमरे में शिक्षा विभाग की कुछ सामाग्रियां रखी हुई थीं। उस कमरे को खाली कराने के लिए सामान वहां से हटवाया जा रहा है।