सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में यूरीन, पस और ब्लड के संक्रमण की जानकारी के लिए कल्चर जांच नहीं शुरू हो पाई है। इससे प्रसूता महिला व अन्य मरीज को जांच के लिए गोरखपुर जाना पड़ रहा है। समय से जानकारी न होने पर मरीजों की जान भी जोखिम में बनी रहती है।
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज इलाज करवाने के लिए आते हैं। इसमें से कुछ मरीजों काे संक्रमण की भी समस्या होती है। जबकि, ऑपरेशन होने और अन्य कारणों से प्रसूताओं में भी डिलेवरी के दौरान संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में समय से जानकारी नहीं होने पर संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे जान जाने का भी खतरा रहता है।
इन सब खतरों के बाद भी माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में अभी तक संक्रमण के कल्चर जांच की सुविधा नहीं शुरू हो पाई है। इससे मरीजों को जांच करवाने के लिए गाेरखपुर या अन्य प्राइवेट जगहों पर जाना पड़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार यह जांच यूटीआई इंफेक्शन या अन्य संक्रमणों का निदान करने में मदद करती है। इस टेस्ट से पेशाब के नमूने में बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीवों की जांच की जाती है। यह संक्रमण की पहचान और सही एंटीबायोटिक उपचार का निर्धारण करने के लिए होता है। पेशाब में पस सेल्स (श्वेत रक्त कोशिकाएं) की उपस्थिति संक्रमण का संकेत होती है। मूत्र में रक्त का आना विभिन्न कारणों से हो सकता है। ऐसे में संक्रमण से गुर्दे की पथरी या कैंसर का खतरा भी बन जाता है।