संवाद न्यूज एजेंसी
गोल्हौरा। बांसी तहसील व ब्लाॅक क्षेत्र के किसानों को खरीफ सीजन में सरकारी बीज गोदाम से वितरित धान बीज खराब मिला था। किसानों का आरोप है कि उन्हें मिलावटी बीज दिया गया, जिसके चलते धान की फसल में समय से पहले बालियां निकलना शुरू हो गई थीं। इससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा और सैकड़ों किसानों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। वहीं नुकसान के कई माह बीत जाने के बावजूद अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है।
कृषि निदेशालय (बीज एवं प्रक्षेत्र अनुभाग) द्वारा जिला कृषि अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा गया था कि धान बीपीटी-5204 प्रजाति में समय से पहले बालियां निकलने की शिकायतों के मामलों में क्षतिपूर्ति से संबंधित जानकारी संकलित कर मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाए। पत्र में धान बीज से संबंधित शिकायतों पर किसानों को होने वाली क्षति के आंकड़े तैयार कर बजट प्राप्त होते ही क्षतिपूर्ति देने की बात कही गई थी।
वहीं बांसी तहसील व ब्लाॅक क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उन्हें न तो मुआवजे की प्रक्रिया की कोई जानकारी दे रहे हैं और न ही उनसे संबंधित विवरण संकलन की कोई ठोस पहल की जा रही है। इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने मांग की है कि बीपीटी-5204 बीज प्रकरण में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रभावित किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा दिलाया जाए। ताकि उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई हो सके।