संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विद्यालयों में अखबार की अनिवार्यता का से जहां छात्रों में पढ़ने की आदत आएगी, वहीं नए शब्दों का भी ज्ञान अखबार से मिलेगा। इससे बच्चों को देश-विदेश, प्रदेश, खेल आदि की जानकारी होगी और बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी। यही नहीं स्क्रीन टाइम भी कम होगा।
शिक्षकों का कहना है कि डिजिटल युग में सतही जानकारी हर जगह उपलब्ध है। इससे गहराई से पढ़ने की आदत बच्चों में कम होती जा रही है। ऐसे में सरकार पढ़ने-लिखने के प्रति प्रोत्साहित कर रही है। शासन के निर्देश पर अब विद्यालयों के प्रार्थना सभागार में छात्रों को अखबार पढ़ाया जाएगा। इससे अखबारों में प्रकाशित कहानी व सामाजिक मुद्दों से बच्चों की समझ बढ़ेगी।
सुडोकू, क्रॉसवर्ड व शब्द पहेलियां मनोरंजन नहीं बल्कि तार्किक ज्ञान बढ़ाती है। विज्ञान, संस्कृति व खेल के बारे में पता चलेगा। निर्देश के तहत रोटेशन से संपादकीय लेख के मुख्य अंश, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय व खेल जगत की खबरें पढ़कर सुनाई जाएंगी। हर रोज अखबार के छह नए व कठिन शब्दों का चयन कर प्रार्थना सभा में अर्थ समेत बताया जाएगा। इससे विद्यार्थियों का शब्दकोष अच्छा होगा।