सिद्धार्थनगर। नेपाल में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद कई नियम प्रभावी किए गए, जिसका असर कुछ दिनों तक बाॅर्डर पर देखने को मिला। नेपाल के धार्मिक और पर्यटन स्थलों से लौटने वाले लोगों ने बताया कि डिजिटल भंसार की सुविधा से आसानी हुई है।
बॉर्डर पार करने के बाद कहीं किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है। बस कागजात सही होने चाहिए। वहीं, होटल में पुराने तरीके से ठहरने की व्यवस्था है। किसी की बाहरी दखल या जांच नहीं हो रही है।
गर्मी में बढ़ जाती है नेपाल में आवाजाही : गर्मी का सीजन शुरू होते ही नेपाल की ओर लोग रूख कर देते हैं। मुक्तिनाथ, प्रभुनाथ, मनोकमना, सूपा देवराली सहित कई धार्मिक स्थल और पयर्टन स्थल पर हजारों की संख्या में लोग जाते हैं।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। नेपाल में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद बाॅर्डर पर कुछ दिन नियम और कानून को लेकर हलचल रही। मुख्य केंद्र बढ़नी और खुनुवां के अलावा ककरहवा बाॅर्डर से चार पहिया वाहन जा रहे हैं, जबकि, अलीगढ़वा और अन्य बाॅर्डर से बाइक वाले जा रहे हैं।
लौटते समय बाॅर्डर पर दिखाना है भंसार का कागजात : बाॅर्डर से नेपाल में प्रवेश करने के लिए भंसार कराना होता है। अब यहां से जाने के बाद और लौटते समय भंसार कार्यालय पर कागजात दिखाना है। कार्यालय पर मौजूद कर्मचारी कागजात देखने के बाद ही आने की अनुमति प्रदान की जा रही है।
कागजात हो तो कहीं कोई परेशानी नहीं : सेहुड़ा गांव निवासी नीतीश मिश्र ने बताया कि इस समय नेपाल में स्थित प्रभुनाथ व सूपादेउराली माता का दर्शन करने के लिए निकले थे। उन्होंने बताया कि बाॅर्डर पर ही भंसार हो गया।
इसके बाद रास्ते में एक जगह चेकिंग हुई। इसमें भंसार देखा गया और पूछा गया कि कहां से आ रहे हैं और कहां जा रहे हैं। यह बताते हुए आगे बढ़ गए।