नेपाल भारत-नेपाल सीमा पर खोलेगा 59 नए बीओपी
भारत की ओर से नया नक्शा जारी करने के बाद नेपाल सरकार ने लिया फैसला
अब तक 107 बीओपी नेपाल ने भारत सीमा पर खोल रखे हैं
चीन सीमा पर एक भी बीओपी नहीं है
नीरज मिश्र/ध्रुव यादव
सिद्धार्थनगर। भारत सरकार की ओर से नया नक्शा जारी किए जाने के बाद नेपाल सरकार भारत-नेपाल सीमा पर 59 नए बीओपी (बॉर्डर आउट पोस्ट) और पहली बार नेपाल-चीन सीमा पर चार बोओपी खोलने की तैयारी में है। इस निर्णय के बाद से यह माना जा रहा है कि नेपाल सरकार भारत की ओर से जारी नए नक्शे और चीन की ओर से कब्जा किए गए 36 हेक्टेयर भूमि पर बेहद गंभीर है और भविष्य में कोई चूक नहीं चाहता है। खास बात यह है कि अब तक नेपाल और चीन सीमा पर नेपाल की ओर से एक भी बीओपी नहीं खोला गया है। जबकि नेपाल में मौजूदा समय में चीन और भारत दोनों का विरोध हो रहा है।
गृहमंत्री राम बहादुर थापा ने प्रतिनिधि सभा के राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति की बैठक में बताया कि नेपाल सरकार सीमा अतिक्रमण को देखते हुए नेपाल की सीमा पर तकरीबन 63 नया बीओपी खोलेगी। अब तक नेपाल-भारत की सीमा एक हजार 880 किमी के दायरे में 107 बीओपी खोला जा चुका है। एक इंस्पेक्टर के साथ 35 जवानों को प्रति बीओपी के हिसाब से तैनाती भी दी गई है। खास बात यह है कि यह बीओपी केवल नेपाल-भारत की सीमाओं पर है। जबकि 1414 किलोमीटर नेपाल-चीन की सीमा पर कोई भी बोओपी नहीं बनाया गया है। नेपाल का मानना है कि भारत के एसएसबी के बीओपी दो से तीन किलोमीटर के दायरे में अपना पोस्ट खोले हुए है। नेपाल के बीओपी की दूरी करीब बॉर्डर से 15 से बीस किलोमीटर के बीच है। इसमें अब अतिरिक्त 59 बीओपी भारत-नेपाल सीमा और चार बीओपी नेपाल-चीन सीमा पर खोला जाना है।
पहली बार नेपाल-चीन सीमा पर खुलेगा बीओपी
चीन की विस्तारवादी नीति से उसके पड़ोसी देश हमेशा से ही परेशान रहे हैं। इस पर चीन ने नया पैंतरा चलते हुए नेपाल की 36 हेक्टेयर की जमीन पर कब्जा कर लिया है। नेपाल में बढ़ती चीनी दखल का विरोध भी शुरू हो गया है। काठमांडू से लेकर नेपाल के तराई जिले में भैरहवा, कपिलवस्तु, नवलपरासी में चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के पुतले फूंककर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। नेपाली नागरिकों के दबाव को देखते हुए पहली बार नेपाल सरकार नेपाल-चीन बॉर्डर पर चार नए बीओपी बनाएगा। वहीं, भारत का नया नक्शा जारी होने के बाद नेपाल में इंडिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन रुक-रुक कर चल रहा है। नेपाली नागरिकों का आरोप है कि कालापानी और लिपुलेख धारचूूला जिले के हिस्सा हैं।