पूर्वांचल में धान का कटोरा के नाम से नवाजे गए जनपद सिद्धार्थनगर के किसानों का बुरा हाल है। खाद, बीज, पानी की व्यवस्था व हाड़तोड़ मेहनत कर तैयार की गई उपज ही अन्नदाताओं की असली पूंजी है। लेकिन सरकारी मशीनरी की लापरवाही के चलते किसानों का उपज सरकारी केंद्र पर नहीं बिक पा रहा है।
प्रशासन द्वारा बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों पर न तो बोरा दिख रहा है न ही पैसा साथ ही यहां तैनात कर्मी भी केंद्रों से नदारद रहते हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लाचार किसान बिचौलियों के हाथ अपनी उपज बेचने को विवश हैं। चर्चा आम है कि हर साल खरीद के नाम पर सरकारी लक्ष्य का कोरम शासन के फरमान पर पूरा होता है। लेकिन इसका अधिकतर लाभ उन्हें मिलता है, जो खरीद के समय में अपनी सेटिंग बना लेते हैं।
शासन के निर्देश पर एक अक्टूबर से खरीद शुरू होना था, लेकिन अब तक अधिकांश किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों का लाभ नहीं मिला। विभागीय जिम्मेदारों की माने तो चालू खरीद में इस वित्तीय वर्ष, धान खरीद का लक्ष्य 45 हजार पांच सौ मीट्रिक टन निर्धारित किया गया।
सभी सरकारी केंद्रों पर 1410 रुपये प्रति क्विंटल की दर किसानों को धान खरीद का मूल्य अदा करना है। आगामी 28 फरवरी 2016 तक धान खरीद का समय तय किया गया है। डुमरियागंज में विपणन के 2, भारतीय खाद्य निगम के 2, पीसीएफ का एक, साधन सहकारी समिति का एक सहित कुल 9 केंद्र संचालित हैं। जिन पर किसानों की उपज का खरीद होना था।
विपणन के इक्का-दुक्का केंद्रों को छोड़, बाकी केंद्रों पर अब तक निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष दो फीसदी भी खरीद नहीं हुई है। जबकि दूसरी तरफ प्राइवेट दुकानदारों के यहां किसानों की हर दिन भारी भीड़ देखी जा रही है। क्षेत्र के कुछ ऐसे भी केंद्र हैं, जहां बैनर तो दिख रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार कर्मी नजर नहीं आते।
डुमरियागंज एसडीएम विनय कुमार सिंह ने कहा कि चुनाव की व्यस्तता के चलते सरकारी क्रय केंद्रों का निरीक्षण ढंग से नहीं हो सका है। कल से मैं स्वयं क्रय केंद्रों का निरीक्षण करूंगा। कुछ केंद्रों से खरीद की रिपोर्ट आई है। सभी केंद्र प्रभारियों से खरीद की स्थिति का जायजा स्वयं लूंगा। किसानों को जिस केंद्र पर दिक्कत हो वे सीधे मुझसे बात करें। यदि किसी कर्मी की लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।