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दलाई लामा आए और रोशन कर गए नौगढ़ स्टेशन

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पूर्व में लगा नौगढ़ रेलवे स्टेशन का बोर्ड - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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दलाई लामा आए और रोशन कर गए नौगढ़ स्टेशन
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बौद्ध धर्म गुरु के स्वागत में बदली थी स्टेशन की तस्वीर
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। जनपद के जन्म से दशकों पहले अस्तित्व में आए नौगढ़ रेलवे स्टेशन से जुड़ी ढेरों दिलचस्प कहानियां हैं। उन्हीं में से एक है इसके विद्युतीकृत होने की। सन 1956 में लुंबिनी स्थित बुद्ध के जन्मस्थान का दर्शन करने तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा का आना हुआ। उनके आगमन का असर रहा कि रेल प्रशासन ने रातोरात पूरे स्टेशन को बिजली की रोशनी से नहला दिया। यह परिवर्तन क्षेत्रवासियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं था। लेकिन, उसके बाद अरसे तक इस स्टेशन के खाते में उपेक्षा, बदहाली समाई रही। नामांतरण संस्कार के बाद से असल नाम पर गर्व कर रहा सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन अब एक-एक कर अपने वजूद से जुड़ी कही-अनकही कहानियों को प्रकट करने लगा है। ‘अमर उजाला’ ने उन कहानियों तक पहुंचने की कोशिश में कुछ ऐसे बुजुर्गों से बात की जिनका इस स्टेशन की उम्र के शुरुआती दौर से अथवा होश संभालने के समय से नाता बना हुआ है। पूर्व विधायक ईश्वरचंद्र शुक्ला के मुताबिक 100 साल पूर्व अंग्रेजों ने नौगढ़ रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया था। इससे पहले शहर के पूर्वी छोर स्थित उसका बाजार तक ही स्टेशन की सुविधा थी। वहां से गोंडा तक रेलवे लाइन बिछी ही नहीं थी।
जब स्टेशन का नजारा बदल गया
72 वर्षीय रामनरेश जायसवाल कहते हैं कि नौगढ़ रेलवे स्टेशन का नाम सिद्धार्थनगर भले ही हो गया, पर उसकी यादें अंतिम सांस तक रहेगी। वर्ष 1956 में बौद्ध धर्म के सर्वोच्च गुरु दलाईलामा लुंबिनी जाने के लिए नौगढ़ स्टेशन पर उतरे। उस समय स्टेशन की तस्वीर ही बदल गई थी। बेहतर सफाई, जेनरेटर से प्रकाश व्यवस्था समेत अन्य यात्री सुविधाओं में इजाफा हुआ था।
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तब एक ही ट्रेन चलती थी
मुख्यालय के 73 वर्षीय अवधेश सिंह का कहना था कि नौगढ़ रेलवे स्टेशन बनने के बाद भी अप-डाउन के रूप में एक-एक ट्रेन का संचालन होता था। वर्ष 1952-53 में हालात यह रही कि इस क्षेत्र के लोग बैंक में पैसा जमा करने के लिए गोरखपुर जाना पड़ता था। इस दौरान भय का वातावरण भी बना रहता था। इसी बीच एक सेठ के मुनीम से मात्र 4500 रुपये की छिनैती भी हुई थी।
पहचान के संकट से मिलेगी मुक्ति
जिला मुख्यालय के 72 वर्षीय हनुमान प्रसाद वैद्य कहते हैं कि होश संभालने के पहले ही नौगढ़ रेलवे स्टेशन का निर्माण हो चुका था। उस दौरान नौगढ़ के नाम से ही देश-विदेश में पहचान थी। अब बदलते परिवेश में थाना कोतवाली, नगर पालिका के बाद रेलवे स्टेशन का नाम सिद्धार्थनगर होने से निश्चय ही नया स्वरूप मिलेगा, साथ ही विकास को गति भी मिलेगी, यह निर्णय सुखद है।
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व्यापार के लिए मुफीद साबित हुआ स्टेशन
75 वर्षीय आनंदी लाल जायसवाल का कहना था कि अंग्रेजों के समय में ही व्यापार करने के लिए व्यापारियों को उसका बाजार रेलवे स्टेशन का सहाना लेना पड़ता था। उसका बाजार और बढ़नी के बीच न रेलवे पटरी बिछी थी और न ही स्टेशनों का निर्माण हुआ था। अंग्रेजों ने रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया। अब सांसद के प्रयास से स्टेशन का नाम सिद्धार्थनगर होने से विकास को गति मिलेगी।
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