पकड़ी बाजार। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के पलिया गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार की रात कथावाचक पं. चंद्रशेखर पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के विवाह की कथा सुनाई। कथा सुन पंडाल में बैठे श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथावाचक ने कहा कि महाराज भीष्मक की कन्या रुक्मिणी का विवाह उसके भाई रुक्मी ने अपने मित्र शिशुपाल से निश्चित कर दिया था। लेकिन रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को मन ही मन में पति के रूप में स्वीकार कर लिया था, इसलिए एक ब्राह्मण के द्वारा श्रीकृष्ण को प्रेम पत्र लिखकर भेज दिया। रुक्मिणी ने पत्र लिखा था हे नाथ मैं शिशुपाल से विवाह नहीं कर सकती और आप ही मेरे सर्वस्व है।
इसलिए आप मेरी प्रार्थना स्वीकार करें और मेरा हरण करके अपनी अर्धांगिनी बना लें। पत्र पढ़ते ही श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के पास पहुंच गए और रुक्मिणी का भगवान ने हरण कर विवाह कर लिया। इस प्रकार से भगवान का यह प्रथम विवाह संपन्न हुआ। आगे भगवान के 16,108 विवाह की कथा सुनाई गई।