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Siddharthnagar News: नायब तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध मिलने पर तबादला, विभागीय जांच शुरू

Fri, 01 May 2026 01:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। बांसी तहसील में तैनात नायब तहसीलदार खेसरहा और उनके तथाकथित प्राइवेट मुंशी पर वरासत के वाद का निस्तारण करने के लिए धन उगाही का आरोप लगा है।
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इसमें डीएम शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर एसडीएम इटवा कुणाल की ओर से की गई जांच में नायब तहसीलदार व प्राइवेट मुंशी की भूमिका संदिग्ध बतायी गई है। इसके बाद डीएम ने नायब तहसीलदार माधुर्य यादव के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बांसी तहसील क्षेत्र के ग्राम टीकुर निवासी ओम प्रकाश चौधरी ने डीएम से शिकायत की थी कि उसका धारा-209 वरासत संबंधी मुकदमा न्यायालय नायब तहसीलदार खेसरहा के पास लंबित है।
आरोप है कि इसमें उसके पक्ष में फैसला करने के लिए नायब तहसीलदार खेसरहा माधुर्य यादव ने अपने प्राइवेट मुंशी जमाल के माध्यम से उससे तीन किस्तों में 30 हजार रुपये लिए हैं। इसके बाद भी मुकदमे का कोई निर्णय नहीं किया जा रहा है। उसने नायब तहसीलदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी, जिस पर डीएम ने एसडीएम इटवा कुणाल को इसकी जांच सौंपी थी।
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एसडीएम ने 22 अप्रैल 2026 को दी गई जांच रिपोर्ट में बताया कि उनके द्वारा 13 अप्रैल 2026 को तहसील बांसी के उपजिलाधिकारी बांसी कक्ष में शिकायतकर्ता का बयान लिया गया, जिसमें उसने बताया कि नायब तहसीलदार खेसरहा के प्राइवेट मुंशी जमाल को पहले 12 हजार रुपये और दोबारा मांग करने पर 18 हजार रुपये दिए।
वहीं, नायब तहसीलदार माधुर्य यादव ने अपने बयान में शिकायतकर्ता से किसी भी माध्यम से धन प्राप्त होने की बात से इन्कार किया गया। प्राइवेट मुंशी जमाल के बारे में पूछा गया तो उनके द्वारा बताया गया वह एक अधिवक्ता के मुंशी है, लेकिन उनके नाम पर वसूली किए जाने के संबंध में उसने अनभिज्ञता जाहिर की।
जांच अधिकारी द्वारा पत्रावली के निर्णय में अत्यधिक समय लगने का कारण पूछे जाने पर नायब तहसीलदार ने प्रचलित वाद में वादी की ओर से लंबे समय तक उपस्थित न रहने और अधिवक्ता संघ के शोक प्रस्ताव आदि के कारण प्रकरण का निस्तारण नहीं हो सका।
जांच अधिकारी ने डीएम को भेजी गई जांच रिपोर्ट में बताया गया कि उभय पक्षों के अभिकथन एवं उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों व पत्रावली के अवलोकन से जांच अधिकारी की ओर से यह निष्कर्ष दिया गया कि प्रथम दृष्टया नायब तहसीलदार माधुर्य यादव व प्राइवेट मुंशी जमाल की कार्यशैली वर्तमान प्रकरण में संदिग्ध प्रतीत होना बताया गया है। जिसके बाद डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने नायब तहसीलदार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने की संस्तुति की है।
लगातार संपर्क में थे शिकायतकर्ता और प्राइवेट मुंशी : जांच रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता और तथाकथित प्राइवेट मुंशी जमाल लगातार आपस में संपर्क में थे, इसकी तसदीक उनके काल लॉग से होती है। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि मामले में संबंधित अधिवक्ता किसी भी पक्ष के अधिवक्ता नहीं है, जिससे उनके तथाकथित मुंशी की सहभागिता औचित्यहीन है।
जांच अधिकारी ने कहा कि ओम प्रकाश बनाम मुदुल उर्फ मुछुल दाखिल 27 मई 2022 से अब तक अनिर्णित होने का कोई ठोस कारण परिलक्षित नहीं होता है। इस तरह शिकायत की जांच में नायब तहसीलदार व प्राइवेट मुंशी की भूमिका संदिग्ध है।
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