कपिलवस्तु। हिमालय की गोद में बसे रहस्यमयी मुस्तांग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांचक पर्यटन के अनूठे संगम ने इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। चालू आर्थिक वर्ष 2082/83 के पहले 11 महीनों में सात लाख से अधिक पर्यटक मुस्तांग पहुंचे हैं, जिनमें बड़ी हिस्सेदारी भारतीय श्रद्धालुओं और सैलानियों की रही।
मुस्तांग जिले के घांसा पुलिस चौकी के आंकड़ों के अनुसार साउन से जेठ तक कुल 7,05,754 पर्यटक मुस्तांग पहुंचे। इनमें 4,60,924 नेपाली और 2,44,830 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। विदेशी पर्यटकों में लगभग 80 प्रतिशत भारतीय नागरिक हैं जो मुस्तांग को नेपाल के सबसे पसंदीदा धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक बना रहे हैं।
जिला पुलिस कार्यालय के पुलिस निरीक्षक संतोष बस्याल के मुताबिक, इस अवधि में 1,51,160 वाहनों ने मुस्तांग की यात्रा की। केवल जेठ माह में ही पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। लगातार अवकाश और पर्यटन मौसम के अनुकूल रहने से मुस्तांग में रौनक चरम पर रही।
भारतीय श्रद्धालुओं के लिए मुस्तांग का सबसे बड़ा आकर्षण विश्व प्रसिद्ध मुक्तिनाथ मंदिर है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा कागबेनी धाम में पितृ तर्पण, कोरला सीमा नाका और ऐतिहासिक लो-मान्थांग की यात्रा भी पर्यटकों को खूब लुभा रही है। कपिलवस्तु समेत नेपाल के तराई क्षेत्र और भारत के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
पर्यटकों की बढ़ती आमद का लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा है। बेनी-जोमसोम मार्ग पर स्थित बेनी, गलेश्वर, तातोपानी और दाना के होटल, लॉज और रेस्तरां पूरे सीजन में पर्यटकों से गुलजार रहे। पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि इस वर्ष कारोबार पिछले वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर रहा।
बर्फ से ढकी चोटियां, अनोखी हिमालयी संस्कृति, सदियों पुरानी बौद्ध और हिंदू विरासत, प्राकृतिक विविधता तथा साहसिक पर्यटन की असीम संभावनाओं ने मुस्तांग को दक्षिण एशिया के उभरते पर्यटन केंद्रों में शामिल कर दिया है। यही वजह है कि हर वर्ष यहां आने वाले भारतीय और विदेशी पर्यटकों की संख्या नए रिकॉर्ड बना रही है।