कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे।
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राष्ट्र के विकास का आधार होती है मातृभाष
कपिलवस्तु(सिद्धार्थनगर)। किसी भी राष्ट्र के विकास का आधार उसकी मातृभाषा है। इतिहास गवाह है कि दुनिया में जिन देशों ने अपना सर्वाधिक विकास किया है, उसमें उनकी भाषा की महत्ता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। ये बातें दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं साहित्यकार प्रोफेसर चितरंजन मिश्र ने कही।
वह सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के तत्वावधान में आयोजित मातृभाषा सप्ताह के तहत आयोजित कार्यक्रम के तीसरे दिन मंगलवार को कही। उन्होंने कहा कि भाषा का योगदान व्यक्ति निर्माण में, समाज और राष्ट्र निर्माण में अनुकरणीय है। भारत को भी यदि विकास के बृहत्तर स्वरूप प्राप्त करना है तो उसे भी अपनी मातृभाषा को महत्ता और उसकी सार्थकता के लिए कार्य करना होगा। सपने देखना और उसे पूरा करना तभी संभव हो पाएगा, जब मातृ भाषा में कार्य करने का अवसर प्राप्त हो। सबको स्वाभाविक रूप से अपनी भाषा से प्रेम होना चाहिए। कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे ने कहा कि भौतिक, वैज्ञानिक और संरचनात्मक प्रगति का आधार वास्तव में भाषा और विशेष रूप से मातृभाषा ही है। कार्यक्रम में आभार ज्ञापन हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने किया। संचालन संयोजक डॉ. सत्येंद्र दुबे ने किया। इस अवसर पर मुख्य नियंता डॉ. दीपक बाबू मिश्र आदि उपस्थित रहे।