संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे हैं, तो यह आपके लिए काम की खबर है। गुर्दे के रोगियों के लिए ठंड बहुत ही घातक है। ऐसे में अगर ठंड से बचकर रहें और अगर मॉर्निंग वाॅक कर रहे हैं, तो बंद कर दें। ऐसी चिकित्सकों की राय है।
डॉ. जितेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि गुर्दे के रोगी का ब्लड प्रेशर अमूमन बढ़ता और घटता है। ऐसे में किडनी पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए ठंड में विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है।
वहीं, मेडिकल कॉलेज की ओपीडी के आंकड़ों की बात करें तो फिजीशियन के पास पांच से आठ रोगी गुर्दे से जुड़े लक्षण वाले पहुंच जा रहे हैं। विशेषज्ञ न होने के कारण उन्हें हायर सेंटर भेजा जा रहा है।
अनियमित दिनचर्या से कई प्रकार की बीमारी हो रही है। इसमें गुर्दे में संक्रमण और खराबी के मामले बढ़ रहे हैं। आमतौर पर लोगों का मानना है कि शराब का सेवन करने वालों को ही यह बीमारी होती है, लेकिन ऐसा नहीं है, ऐसी विशेषज्ञों की राय है। उनका कहना कि गुर्दे की खराब में ब्लड प्रेशर का बढ़ना सबसे घातक है।
डॉ. कनिका मिश्रा का कहना है िक अगर व्यक्ति तनाव में है और उससे लगातार ब्लड प्रेशर कम और अधिक हो रहा तो उसका प्रतिकूल असर उसके गुर्दे पर पड़ता है। लगातार दबाव बना होने के कारण कई बार गुर्दा काम करना बंद कर देता है, या खराब हो जाता है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के डायलिसिस वार्ड के आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय में गुर्दे के 123 मरीज पंजीकृत हैं। जिनका डॉक्टर की सलाह पर डायलिसिस हो रहा है। नेफ्रोलॉजी का कहना है कि ठंड गुर्दे की बीमारी वालों के लिए बहुत ही नुकसानदेह है। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इसलिए किडनी के फेल होने के चांस अधिक रहते हैं। ऐसे में सलाह है कि अगर मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं, तो उसे बंद कर दें या सूर्य उदय के कुछ समय व