सिद्धार्थनगर। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के परिदृश्य ने सिद्धार्थनगर जिले के हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के बड़ी संख्या में युवक संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और ओमान जैसे खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। युद्ध की खबरों और मिसाइल हमलों के वीडियो सामने आने के बाद जिले के गांवों में बेचैनी और डर का माहौल है। परिजन लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिये अपनों का हाल जानने की कोशिश में लगे हैं।
जिले से अनुमानित पांच हजार से अधिक युवक खाड़ी देशों में रोजगार के लिए गए हैं। इनमें से अधिकांश निर्माण कार्य, होटल, ड्राइविंग, सुरक्षा गार्ड और तकनीकी कार्यों से जुड़े हैं। इनकी कमाई से ही जिले के हजारों परिवारों का घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई और मकान निर्माण जैसे काम पूरे होते हैं।
जिले के शोहरतगढ़, बांसी, इटवा और डुमरियागंज क्षेत्रों के गांवों में इस समय युद्ध और अपनों की सुरक्षा ही चर्चा का विषय है। हर घर में एक ही सवाल है, अपने सुरक्षित हैं या नहीं। विदेश में काम कर रहे ये युवा न केवल अपने परिवार बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था की भी मजबूत कड़ी हैं। ऐसे में युद्ध का यह परिदृश्य जिले के सामाजिक और आर्थिक दोनों ताने-बाने के लिए चिंता का कारण बन गया है।
हर कॉल पर टिकी परिवारों की उम्मीद
- बर्डपुर निवासी राहुल त्रिपाठी जो खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत हैं उन्होंने फोन पर बताया कि वे फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन हालात को लेकर डर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लोग सतर्क हैं।
चकाईजोत निवासी योगेंद्र त्रिपाठी कतर में कार्यरत हैं। उनके परिजनों ने बताया कि वे लगातार संपर्क में हैं और स्थिति सामान्य होने की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, सऊदी अरब में कार्यरत नौगढ़ क्षेत्र के रामरतन गुप्ता ने बताया कि माहौल शांत है, लेकिन युद्ध की खबरों से चिंता बनी हुई है।
-
रोजगार के लिए खाड़ी देशों का रुख क्यों
- जिले में सीमित रोजगार के अवसर
- कम शिक्षा में भी विदेश में रोजगार की संभावना
- 25 से 50 हजार रुपये तक मासिक आय
- एजेंट और परिचितों के माध्यम से भर्ती
- परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रमुख साधन