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अब केंचुआ भी देंगे स्वचछता के संदेश

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केंचुआ खाद बेचकर खुशहाल हुईं माया
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सोहना के वैज्ञानिकों ने दी वर्मी कंपोस्ट बनाने की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
मन्नीजोत। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना से प्राप्त हुए जयगोपाल नामक केंचुआ प्रजाति से स्वयं सहायता समूह की तरक्की शुरू हो गई है। समूह की मुखिया माया चौधरी ने बताया कि केंद्र की ओर से उन्हें पांच किग्रा केंचुआ मिला था, उसी के माध्यम से उन्होंने उत्पादन बढ़ाया। इससे उन्होंने पांच क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया। जिसके प्रयोग आम की नर्सरी एवं अन्य सब्जियों की खेती में की जा रही है। इसके साथ ही वर्मी कंपोस्ट को दूसरे किसानों में बेचा जा रहा है। इस व्यवसाय में माया का परिवार काफी खुश है। वह रोल मॉडल के रूप में आसपास के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। तकनीकी सहयोग के लिए केवीके सोहना के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा टीम के साथ-साथ समय-समय पर सहयोग दे रहे हैं।
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वर्मी कंपोस्ट बनाने की वैज्ञानिक विधि
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा ने किसानों को प्रशिक्षण देते हुए कहा कि अच्छी गुणवत्ता की केंचुआ खाद बनाने के लिए सीमेंट और ईंटों से पक्का वर्मी पीट बनाया जाता हैं। वर्मी पीट को तेज धूप और वर्षा से बचाने और केंचुओं के तीव्र प्रजनन के लिए अंधेरा रखने के लिए छप्पर या हरे नेट से ढकना अत्यंत आवश्यक है। वर्मी पीट को भरने के लिए पेड़-पौधों की पत्तियां घास, सब्जी और फलों के छिलके, गोबर आदि अपघटनशील कार्बनिक पदार्थों का चुनाव करते हैं। इन पदार्थों को वर्मी पीट में भरने से पहले ढेर बनाकर 15 से 20 दिन तक सड़ने के लिए रखा जाना आवश्यक है। सड़ने के लिए रखे गए कार्बनिक पदार्थों के मिश्रण में पानी छिड़क कर ढेर को छोड़ दिया जाता है।
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