संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को शब-ए-बरात मनाया गया। इस रहमतों व बरकतों वाली रात को जागकर मुसलमानों ने इबादत की। रोजा रखा और कब्रगाहों में वालिदैन के लिए दुआएं कीं। इस्लामिक कैलेंडर हिजरी के आठवें महीने शाबान माह की पंद्रहवीं रात शब -ए -बरात है, जो इस्लाम में महत्वपूर्ण है। यह रात गुनाहों से छुटकारे की रात है। कस्बे की पटेल नगर वार्ड में ईदगाह के पास वाली व नरकटहा सहित क्षेत्र की सभी कब्रगाहों की साफ-सफाई कर बिजली की झालर लगाकर सजाया गया था। जहां अकीदतमंदों ने पूरी रात जागकर अपने मोमनीन के लिए दुआएं मगफरत की और शब्बेदारी कर चिरागां किया।
ऐसा मानना है कि इस महीने में इंसानों के द्वारा किए गए कार्यों का लेखा जोखा फरिश्ते अल्लाह के सामने पेश करते है तथा पूरे साल में इंसानों को दी जाने वाली रोजी का निर्धारण इसी महीने में होता है। यही वजह है कि इस महीने का खास महत्व है। खासकर शब -ए -बरात की रात किए गए इबादत, रोजा, नमाज, व तिलावत का यह रात बरकतों व रहमतों वाला है।
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घरों में विभिन्न प्रकार का हलुआ
बांसी। शब -ए -बरात पर मुसलमानों ने आशिक-ए-रसूल हजरत उवैस करनी की याद में घरों में कई प्रकार का हलुआ बनवाया, जिसे पूरे परिवार ने तो खाया ही अपने अजीजों अकारिब को भी खिलाया। बताया जाता है कि इसी दिन नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद साहब का एक दांत शहीद हो गया, यह जानकारी मिलने पर आशिके रसूल हजरत ओवेस करनी ने अपने सभी दांत तोड़ दिए। दांत न होने के कारण उन्हें हलुआ खिलाया गया।