सिद्धार्थनगर। इटवा थाने के ग्राम मैनभरिया निवासी ममता नागपंचमी व रक्षाबंधन त्योहार मनाने अपने मायके गनवरिया पूरब आई थी। दो वर्षीय बेटी की मां ममता को रक्षाबंधन के दूसरे दिन अपनी ससुराल मैनभरिया लौटना था। लेकिन, विधि को कुछ और ही मंजूर था। अब वह कभी अपने घर नहीं लौटेगी। ममता की मौत से ससुराल मैनभरिया और मायके गनवरिया में मातम छाया हुआ है।
उसकी मौत भतीजे को बचाने के चक्कर में हुई। क्योंकि जब एकाएक वह बिजली के संपर्क में आया तो उसे कुछ दिखाई नहीं दिया और बचाने के लिए दौड़ पड़ी। क्योंकि उस समय भतीजे को बचाने की उसकी प्राथमिकता था, उस समय उसे कहां ध्यान था कि बिजली आपूर्ति बंद करना चाहिए। जैसे ही वह आरुष को पकड़ी वह भी सट गई। चीख सुनकर जबतक परिवार के लोग अंदर पहुंचते और आपूर्ति बंद करते दोनों ने दम तोड़ दिया। ममता का राखी बांधने का सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया। एक साथ दो-दो मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।