सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद ने महाराजा गुह्यराज निषाद की जयंती सोमवार को धूमधाम से मनाई। नौगढ़ तहसील परिसर में आयोजित कार्यक्रम में स्वजातीय लोगों ने महाराजा गुह्यराज का पूजन-अर्चन किया और समाज की उन्नति, तरक्की की रूपरेखा तय की।
समारोह में प्रदेश प्रभारी महेंद्र निषाद ने कहा कि महाराज गुह्यराज निषाद का जन्म त्रेतायुग में चैत शुक्ल पक्ष पंचमी को श्रृंगवेरपुर इलाहाबाद में हुआ था। श्रीराम के जन्म का रहस्य भी श्रृंगवेरपुर व मखौड़ा से जुड़ा हुआ है।
महाराज निषादराज की पूजा व उनके धाम के दर्शन से व्यक्ति की दशा और दिशा दोनों सुधर जाती है। जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर साहनी ने कहा कि इस देश के मूल निवासी निषाद वंश के लोग हैं। देश की सभ्यता व संस्कृति निषाद संस्कृति रही है।
दुनिया की खोज करने वाला कोलंबस व वास्कोडिगामा निषादवंशीय थे। भारत में आर्यों के आगमन के पूर्व निषाद सभ्यता व संस्कृति चरम पर थी, परंतु आर्यों के आगमन के बाद निषादों की सभ्यता व संस्कृति नष्ट कर दी गई। देश के स्वाधीनता संग्राम में निषादों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मित्र निषादराज का नाम लेकर 2017 में यूपी की सत्ता पर काबिज होना है। समारोह में मनोज निषाद, लालजी निषाद, गंगाराम, फूलचंद, रामसेवक, सुरेश निषाद, शिवबर, भानू, मुकेश कुमार, हजारी पहलवान, मुसाफिर, रामलखन निषाद, राज, रामतीरथ, रामअधारे, बबलू साहनी, अनिल साहनी, केशवराम निषाद, राजेंद्र आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता जवाहर लाल निषाद ने किया।