सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु के चैनपुर नोनहवा मार्ग पर पिपरासन में मिट्टी माफिया द्वारा खोदा गया स
भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु के आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन करके प्राचीन टीलों का अस्तित्व समाप्त किया जा रहा है। मिट्टी का धंधा करने वाले माफिया ने पिपरासन के संरक्षित टीले को खोदकर मिट्टी बेच दी और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। संरक्षित स्थान पर खुदाई में मिट्टी के बीच से निकल रही ईंटें दो से तीन हजार वर्ष पुरानी बताई जा रहीं हैं।
डेढ़ साल पहले कपिलवस्तु से तीन किमी दूर लाला पंचगवां में टीले की खुदाई के शिकायत पर प्रशासन जागा था तो प्राचीन टीले को खोदने पर अंकुश लगा था। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राचीन इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीता यादव ने पीएमओ को ई-मेल भेेजा था। पीएमओ ने इसका संज्ञान लिया और केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लखनऊ से रिपोर्ट मांगी थी, उसके बाद जिले के सभी गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण करने का आदेश हुआ।
यह सर्वेक्षण पूरा नहीं हुआ, जबकि इसी बीच दूसरे टीले में खुदाई हो रही है। यदि इसकी खुदाई होती रही तो पिपरासन टीले का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। डॉ. नीता यादव बताती हैं कि उत्खनन हो तो इस क्षेत्र में नेपाल के लुंबिनी से अधिक पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त होने की संभावना है। हालांकि, सर्वेक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद ही उत्खनन की संभावना बढ़ेगी। केंद्रीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण पुरातात्विक आफताब ने बताया कि सिद्धार्थनगर के 1136 गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण होना है। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।