सिद्धार्थनगर। सोशल मीडिया के फेसबुक पेज पर पेंसिल बनाने आदि का प्रचार सामने आता है तो दिए गए नंबर पर कतई कॉल न करें। क्योंकि घर बैठे रोजगार पाने के लालच में आपकी जमा पूंजी भी चली जाएगी। साइबर ठगों के फैलाए जाल में फंसकर अबतक कई लोग धन गवां चुके हैं। जिले में नये ट्रेंड के इस अपराध में अबतक 15 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। साइबर एक्सपर्ट की राय है कि सोशल मीडिया पर स्वरोजगार दिलाने के नाम पर गलत सूचना प्रसारित करके अपराधी लोगों से ठगी कर रहे हैं। सावधानी से ही इनसे बचा जा सकता है।
साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिस जितनी तकनीक का प्रयोग कर रही है। उससे दो नहीं, बल्कि चार कदम आगे साइबर ठग ठगी का नया ट्रेंड शुरू कर दे रहे हैं। बिना सामने आए जेब पर डाका डालने का यह धंधा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। सरकार महिलाओं को स्वरोजगार बनाने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रही है। जिसमें वे घर बैठे अच्छी कमाई कर रही हैं। अब साइबर ठग उस फार्मूले को अपना लिए हैं। वह महिलाओं को जाल में फंसा रहे हैं। फेसबुक पेज पर एड भेज रहे हैं। पेंसिल बनाओ और घर बैठे 20 हजार महीना कमाओ का लालच देते हैं। नंबर पर कॉल करते ही जाल में फंसा रहे हैं और ठगी कर हैं। जिले में अबतक इस प्रकार के 15 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं जो साइबर सेल तक पहुंचे हैं। न जाने कितने केस होंगे, जिनमें ठगी का शिकार होने के बाद कोई शिकायत करने के लिए आगे ही नहीं आता है। ठगी का यह तरीका चिंताजनक है। क्योंकि महिलाएं बिना जाने उनके जाल में आसानी से फंस जाती है। एक्सपर्ट जागरूकता से इससे बचने की सलाह दे रहे हैं।
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इस प्रकार से बनाते हैं शिकार
आज हर परिवार में लगभग सभी सदस्यों के पास स्मार्टफोन है। सभी लोग सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं। साइबर ठग फेसबुक पेज पर पेंसिल और घर बैठे अन्य रोजगार परक कार्य के लिए एड पोस्ट करते हैं। एक माह में 15-20 हजार कमाने का लालच देते हैं। साथ ही नंबर पर डाल देते हैं और लिख देते हैं कि रोजगार से जुडऩे के लिए इन नंबरों पर कॉल करें। कॉल करने के बाद बाद दिए गए नंबर पर सभी दस्तावेज के साथ ऑनलाइन रजिस्टे्रशन करने के लिए कहते हैं। साथ ही बताते हैं कि घर पर ही हम पेंसिल बनाने का रॉ मटेरियल पहुंचा देंगे। बनाकर पैकिंग करने का कार्य रहेगा, फिर उसे उठवा लेंगे। पीस के हिसाब से धनराशि दी जाएगी। इसके लिए 500 रुपये में रजिस्टे्रशन करवा लीजिए। रजिस्टे्रशन के बाद रॉ मटेरियल भेजने के नाम पर 15-20 हजार रुपये मंगवा लेते हैं। इसके बाद फोन उठाना और बात करना बंद कर देते हैं।
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भाषा सुनकर परख लेते हैं कि गंवई है महिला
शहर से लेकर गांव में मोबाइल फोन पर सोशल मीडिया में बने रहने का लोगों का शौक बढ़ गया है। इसमें ग्र्रामीण महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। पहले ठग यह जान लेते हैं कि यह गंवई महिला है। फंसाने के बाद घर बैठे रोजगार के नाम पर लड़ाई करके रुपये देगी। इसके बाद लंबी-लंबी बात करके उन्हें ठगी का शिकार बना लेते हैं। गांव की महिलाएं ठगी का शिकार होने के बाद शिकायत करने के लिए भी आगे नहीं आती हैं। अबतक जो मामले आए हैं, उसमें सभी ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाली महिलाएं हैं।
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पति से लड़कर भेजवाई रकम, हो गई ठगी का शिकार
जोगिया कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला फेसबुक पेज पर नंबर देखकर पेंसिल बनाने के लिए कॉल की। बात पक्की हो गई। इसके बाद पति से भी बात करवाई। फिर पति पर दबाव बनाकर रुपये खाते में भेजवाया। जब 15 हजार रुपये भेजने के बाद नंबर बंद कर दिया। पहचान वाले को इस बारे में सूचना दी तो उसने कहा कि ठगी का शिकार हो गए।
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गृहस्थी सुधारने के चक्कर में चली गई रकम
ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढऩी निवासी नवविवाहित महिला भी साइबर ठगों के जाल में फंस गई। वह मायके में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कार्य कर चुकी थी। काम करने की उसे ललक थी। फेसबुक के जरिए पेंसिल बनाने का एड देखकर फंस गई। गृहस्थी सुधारने के लालच में खाते में रखे 20 हजार रुपये ठग के बताए खाते में भेज दिए। जब दिए गए नंबर पर बात बंद हो गई तब पता चला कि वह ठगी का शिकार हो गई है।
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बोले जानकार
कोई भी कंपनी सोशल मीडिया पर रोजगार देने का प्रचार नहीं करती है। वह समाचार पत्र और टीवी के जरिए जानकारी देती है। मौजूदा समय में साइबर ठग पेंसिल सहित अन्य सामग्री घर बैठे बनाकर देने पर प्रतिमाह मोटी कमाई का लालच सोशल मीडिया पेज पर दे रहे हैं। उनके दिए गए नंबरों पर कतई बात न करें। अगर करते हैं तो ठगी का शिकार हो जाएंगे। क्योंकि अब तक कई लोग इस अपराध के शिकार हो चुके हैं। इसलिए जागरुकता जरूरी है। -अतुल कुमार चौबे, साइबर एक्सपर्ट साइबर सेल
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ठगी का शिकार होते ही दें जानकारी
अगर आपको पता चल गया कि साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं तो तत्काल साइबर सेल या फिर नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी आप शिकायत करेंगे, रुपये वापस होने की संभावना उतनी अधिक रहेगी। क्योंकि ठग एक खाते से दूसरे खाते में रुपये भेज देते हैं। सूचना देने में जितना वक्त बर्बाद होता है, उतनी दिक्कत बढ़ती है। इसलिए शिकायत समय पर करें और जो हुआ हो वही बताएं। लगातार टीम गए रुपये वापस भी करवा रही है। -राजेश कुमार शुक्ल, प्रभारी साइबर सेल