खुनुवां/ सिद्धार्थनगर। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी और भगवान शिव की नगरी काशी (वाराणसी) को एक साझा धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। इसी उद्देश्य से नेपाल के लुंबिनी में तीन दिवसीय लुंबिनी-बनारस (बिजनेस टू बिजनेस) ट्रैवल मार्ट और फैम ट्रिप का शुभारंभ हुआ।
आयोजन के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति देने के साथ दोनों देशों के पर्यटन उद्योग को भी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। लुंबिनी होटल एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस ट्रैवल मार्ट में भारत के वाराणसी, दिल्ली, लखनऊ और बोधगया सहित विभिन्न शहरों से ट्रैवल एजेंसियों, टूर ऑपरेटरों और होटल व्यवसायियों समेत करीब 40 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। आयोजन की खास बात यह है कि इसे किसी सरकारी या बाहरी आर्थिक सहयोग के बिना स्थानीय होटल व्यवसायियों ने अपने संसाधनों से आयोजित किया है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में लुंबिनी और वाराणसी के होटल संचालकों और पर्यटन कारोबारियों के बीच होटल पैकेज, धार्मिक पर्यटन मार्ग, पर्यटकों के आदान-प्रदान, संयुक्त प्रचार-प्रसार और व्यावसायिक साझेदारी पर विस्तृत चर्चा होगी। उम्मीद है कि इससे दोनों धार्मिक नगरों के बीच पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय पर्यटन उद्योग को नया बाजार मिलेगा। लुंबिनी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष लीलामणि शर्मा ने कहा कि लुंबिनी और काशी दोनों विश्वस्तरीय धार्मिक आस्था के केंद्र हैं।
यदि दोनों स्थलों को एक साझा पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाता है तो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध भी और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल लुंबिनी की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और व्यापक बनाने में मददगार साबित होगी।