सोशल डिस्टेंसिंग के बीच सरकारी दफ्तरों में लौटी रौनक
छूट मिलने पर दोपहर 12 बजे तक बढ़ी भीड़, फिर पसरा सन्नाटा
ग्रीन जिले की श्रेणी में होने के बाद भी साफ दिखा कोरोना का भय
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घोषित लॉकडाउन में सोमवार से रियायत देने की घोषणा के बाद सरकारी कार्यालयों में रौनक लौट आई। अफसर और कर्मचारियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करने के साथ मास्क, ग्लव्स आदि के प्रयोग कर कार्य एवं दायित्वों का निर्वहन किया। दोपहर 12 बजे के बाद सड़कों पर पहले जैसा ही सन्नाटा दिखा। आम लोगों पर अभी भी कोरोना संक्रमण का भय साफ दिख रहा है।
लॉकडाउन के द्वितीय चरण की अवधि में 20 अप्रैल से ग्रीन जिलों में कुछ शर्तों पर रियायत देने का निर्णय लिया गया। इसके तहत सोमवार को सरकारी कार्यालयों में लंबित कार्यों को निपटाने में अफसर और कर्मचारी जुटे रहे। सीएमओ डॉ. सीमा राय, समाज कल्याण अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी एजाजुल हक खान, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश, बीएसए डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, जिला विद्यालय निरीक्षक अवधेश नारायण मौर्य भी अपने-अपने कार्यालयों में अधीनस्थों के साथ कार्य किया।
इस मौके पर सोशल डिस्टेेंसिंग का ख्याल रखा गया। मास्क, ग्लव्स और सैनिटाइजर के प्रयोग पर विशेष जोर रहा। रियायत की श्रेणी में जिले में भी छूट मिलने की संभावना को देखते हुए सुबह पांच बजे से पहले की अपेक्षा सड़कों पर भारी भीड़ दिखी। इस दौरान कृषि कार्य समेत एकाध अन्य दुकानों के ही खुलने पर लोग निराश होकर घरों को वापस हो गए। सब्जी, दवा, किराना की दुकानों पर भीड़ रही। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद सड़कें सूनी हो गईं।
पर्ची कटवाने के लिए लगीं कतारें
संयुक्त जिला चिकित्सालय में रियायत की खबर सुनकर अन्य दिनों की अपेक्षा मरीजों की संख्या बढ़ी, पर पूर्व की भांति सोशल डिस्टेंस के तहत लंबी कतार लगवाकर पर्ची दी गई। गंभीर रोगों के चिकित्सक कक्षों में भी एक-एक कर मरीजों को भेजने का कार्य किया गया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी ने कहा कि सोशल डिस्टेंस का पूरा ख्याल रखा गया।
मेडिकल कॉलेज का निर्माण अभी भी ठप
रियायत की श्रेणी वाले जिलों में मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों को काम के साथ ही हाईवे और मेडिकल कॉलेज के निर्माण को छूट दी गई है पर यहां हाईवे और मेडिकल कॉलेज का निर्माण सोमवार को भी ठप रहा। इसके पीछे मजदूरों का अपने-अपने घरों को पलायन किया जाना प्रमुख कारण है।