संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पर्यटन विभाग की तरफ से जिले में नेपाल के सीमावर्ती पांच गांवों में पर्यटकीय विकास किया जाएगा। यहां विदेशी पर्यटकों को स्थानीय जीवन शैली, परंपराओं, परिधानों व खानपान से परिचित कराते हुए देसी संस्कृति की झलक दिखाई जाएगी। इन पर्यटकों के ठहरने के लिए प्रत्येक गांव में 10 होम स्टे यूनिट तैयार किए जाएंगे।
पर्यटकों को यहां की ऐतिहासिक एवं भौगोलिक महत्ता की बेहतर जानकारी देने के लिए गांवों के लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे जहां यह गांव पर्यटन क्षेत्र के मानचित्र में अपना स्थान बनाएंगे, वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा।
पर्यटन विभाग की तरफ से बर्डपुर ब्लॉक के दुल्हा सुमाली व बजहा, शोहरतगढ़ ब्लॉक के खुनुवा, बढ़नी ब्लॉक के कोटिया व घरूआर गांवों में पर्यटकीय विकास की योजना है। नेपाल के सीमा क्षेत्र में स्थित जिले के यह गांव ऐतिहासिक एवं भौगोलिक महत्व के साथ ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इनमें सभी गांव नेपाल सीमा से एक से दो किमी दूरी के अंदर स्थित है, जहां रहकर पर्यटक नेपाल के भी सांस्कृतिक एवं पर्यटकीय क्षेत्रों का भ्रमण कर सकेंगे। पर्यटन विभाग की तरफ से चयनित इन गांवों का विकास होने से विदेशी पर्यटकों को नए पर्यटन केंद्र के तौर पर ठौर मिल सकेगा। जहां वह ग्रामीण परिवेश में रहकर स्थानीय संस्कृति को समझ सकेंगे। पर्यटन विभाग की तरफ से चयनित किए गए हर गांवों में अपनी अलग ही पहचान है।
सागर व बाजार है बजहा की पहचान : नेपाल सीमा से लगभग डेढ़ किमी दूर स्थित दो हजार आबादी वाले बजहा गांव की पहचान वर्तमान में कई एकड़ में फैला बजहा सागर है। इस सागर का निर्माण अंग्रेजों ने आसपास के गांवों के खेतों की सिंचाई के लिए कराया था। वहीं यहां लगने वाला बाजार भी बजहा की पहचान रही है। इंडो-नेपाल सीमा सड़क पर स्थित बजहा गांव प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक रूप से बहुत समृद्ध है। यहां पर्यटक स्थानीय संस्कृति के साथ प्राकृतिक सुविधाओं का आनंद उठा सकेंगे।
अंग्रेजों का ठौर रहा दुल्हा सुमाली : नेपाल सीमा से दो किमी दूर दुल्हा सुमाली गांव अंग्रेजों के ठौर के तौर पर जाना जाता है। यहां पर्यटन की तरफ से इस गांव के टोला ककरहवा का चयन किया गया है, जहां साप्ताहिक बाजार लगती है। यहां का ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व है। यहां से नेपाल में यात्रा सुगम रहती है। यहां पर्यटकीय विकास होने से जहां नेपाल तक से व्यापारिक साझेदारी विकसित होगी, जिससे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही यह क्षेत्र कालानमक की खेती के लिए भी प्रसिद्ध है।
कालानमक की खेती के लिए प्रसिद्ध है खुनुवां क्षेत्र : पर्यटन विभाग की तरफ से चयनित किया गया शोहरतगढ़ ब्लॉक का खुनुवां गांव वर्तमान में नेपाल सीमा पर स्थित बड़ा कस्बा है। इसके आसपास किसान कालानमक धान की खेती करते है, जो जिले का ओडीओपी घोषित है। यहां का पर्यटकीय विकास होने से आने वाले विदेशी पर्यटकों को कालानमक के महत्व को अवगत कराते हुए उसके निर्यात को बढ़ावा मिल सकेगा। साथ ही पर्यटकों के