सिद्धार्थनगर। मुख्यालय के नगर पालिका विकास पर करोड़ों रुपये खर्च हुए बावजूद इसके समस्याएं जस की तस हैं। जलनिकासी की समस्या से मुख्यालय जूझ रहा है। अध्यक्ष बदले पर स्थितियां नहीं बदलीं। आज भी मुख्यालय के लोग जलनिकासी की समस्या से जूझ रहे हैं। हल्की बरसात ने जलनिकासी की पोल खोल दी है। नाले चोक तो नालियां जमींदोज पड़ी हुई हैं और जिम्मेदार मूकदर्शक बने बैठे हैं। नालियों और नालों की शृंखला बिछाई गई, जिससे लोगों को जलनिकासी की समस्या से ने जूझना पड़े पर बिना मास्टर प्लान के बने निर्माण से लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
नगर पालिका सिद्धार्थनगर जलनिकासी की समस्या से जूझ रहा है। वार्डों में नालियां बनवाने के लिए लाखों रुपये खर्च हुए हैं बावजूद इसके नालियां चोक पड़ी हुई हैं। पहले ही बरसात से जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। नगर पालिका वार्डो में नालियों का संजाल बिछाया गया है बावजूद इसके साफ सफाई और गुणवत्ताविहीन निर्माण ने इसमें कोई सुविधा नहीं मुहैया कराई गई। नालियों का गंदा पानी कल भी सड़कों पर फैला रहता था और आज भी फैला है। बेलहिया चौराहा से गोरखपुर जाने वाले रोड का नाला चोक पड़ा है।
नाला के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़क पर फैल रहा है, लेकिन नगर पालिका का कहना है कि नाला उसके क्षेत्र से बाहर है। नगर पालिका में बनी नालियों की जल निकासी की व्यवस्था जमुआर नाले पर निर्भर है। तल ऊंचा होने के कारण नालियों का पानी जमुआर नाले तक नहीं पहुंचता है, उल्टे बरसात के समय नाले का पानी नालियों के सहारे मोहल्लों में पहुंचता है। बौद्ध परिपथ के उच्चीकरण के बाद स्थितियां और खराब हुई हैं, नालों का तल नीचे खिसक गया है, जिससे नाले ओवरफ्लो होकर सड़क पर गंदगी फैला रहे हैं। गोबरहवां बाजार जाने वाले मार्ग पर नालियों से दुर्गंध के कारण खासी परेशानी होती है पर लोगों को इसी दुर्गंध के बीच आना-जाना पड़ता है।