मात्र ढाई माह में न्यायालय विचारण करके सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद रफी की अदालत ने मात्र ढाई माह में सुनवाई कर चार हत्याभियुक्तों में से एक को आजीवन कारावास और शेष तीन को बरी कर दिया। कोर्ट ने मोहाना थाना क्षेत्र के पननी निवासी संजय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, शेष तीन राजकुमार, संदीप एवं बबिता को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। सभी अभियुक्त उन पर हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट सार्वजनिक स्थल पर दंगा बलवा करने के अपराध में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था।
घटना 28 मई 2023 में मोहाना थानाक्षेत्र के पननी में बच्चों के झगड़े को लेकर घटित हुआ था। पननी रोड निवासी रामकेशव ने पुलिस को तहरीर देकर कहा कि 28 मई 2023 को बच्चों-बच्चों में झगड़ा हो गया था। उसके गांव निवासी संजय, राजकुमार, संदीप , किशुन, बबीता व केवेली आदि ने उसके परिवार वालों से मारपीट किया था। जिसकी सूचना उसने लिखित तौर पर थाना मुकामी को दिया था। इसपर परिवार के चार लोगों का डाक्टरी मुआयना पुलिस ने कराया था।
दूसरे दिन 29 मई 2023 को सुबह छह बजे उसके भाई अपने एक मकान से दूसरे मकान पर जा रहे थे कि सभी लोगों ने उसके भाई अजयसेन को घेर कर गोलबंद होकर हमला कर दिया। जब अजयसेन ने चिल्लाना शुरू किया तो उसके पिता राजमन और रामविलास पहुंचे। सभी लोग इन सब पर भी टूट पड़े और मारपीट कर तीनों को मरणासन्न अवस्था में छोड़कर भाग गये। वह भी शोर सुनकर वहां पहुंचकर उसने देखा कि सभी लोगों ने धारदार हथियार सब्बल, हंसिया, लाठी, डंडा लेकर मेरे भाई रामविलास, चाचा राजमन, पिता रामविलास पर हमला कर प्रहार किया था। बाद में इलाज के दौरान अजयसेन की मृत्यु हो गयी थी।
पुलिस ने केस दर्ज करके विवेचना के बाद हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट, सार्वजनिक स्थल पर दंगा बलवा के अपराध में चारों को आरोपित करके न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया। कोर्ट ने संजय को आजीवन कारावास की सजा सुनते हुए उस पर तीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जिसे मृतक की पत्नी को देने का आदेश भी दिया। अभियोजन पक्ष से पीड़ित की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार मिश्र ने किया। पुलिस के आपरेशन कन्विक्शन के क्रम में अपराधियों के विरूद्ध प्रभावी पैरवी जिला मानिटरिंग सेल तथा न्यायालय पैरोकार मुख्य आरक्षी सुरेंद्र प्रसाद थाना मोहाना ने किया।
27 फरवरी को हुई थी पहली गवाही
प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में पत्रावली ट्रांसफर होकर 21 फरवरी 2024 को प्राप्त हुई जिसमें त्वरित निस्तारण के लिए उच्च न्यायालय का आदेश था। इसके बाद करीब ढाई माह में ही जल्द से जल्द गवाही इत्यादि की प्रक्रिया पूरी करके न्यायालय ने विचारण की समाप्ति पर फैसला सुनाया। मामले में पहली गवाही 27 फरवरी को हुई थी।