सिद्धार्थनगर। भत्तों में वृद्धि, भूलेख और अन्य सहायक पटल पर संबद्ध लेखपालों को अवमुक्त करने समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर चल रहा लेखपालों का आंदोलन अब आम लोगों की मुश्किल बढ़ा सकता है। प्रदेश स्तरीय आंदोलन के समर्थन में जिले की पांचों तहसीलों में लेखपालों ने अतिरिक्त हल्कों का चार्ज छोड़कर उनके बस्ते तहसील में जमा कर दिए हैं। इससे 176 हल्कों के करीब 500 गांव प्रभावित होंगे।
अतिरिक्त हल्कों में अब आय, जाति, निवास, वरासत, खसरा समेत राजस्व से जुड़े अन्य कार्य नहीं किए जाएंगे। लेखपाल केवल अपने मूल हल्के का काम करेंगे। फिलहाल इसका व्यापक असर दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन आंदोलन लंबा खिंचने पर संबंधित गांवों के लोगों को प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी कार्यों के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है। लेखपालों ने मंगलवार और बुधवार को संबंधित अधिकारियों के पास अतिरिक्त हल्कों के बस्ते जमा किए। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश स्तर से आंदोलन के संबंध में कोई नया निर्णय आने तक अतिरिक्त हल्कों का काम नहीं किया जाएगा।
नौगढ़ संवाद के अनुसार तहसील क्षेत्र में कुल 130 हल्के हैं, जबकि वर्तमान में 95 लेखपाल तैनात हैं। इनमें 35 लेखपाल अतिरिक्त हल्कों का काम देख रहे थे। लेखपाल संघ के तहसील अध्यक्ष महेंद्र साहनी ने बताया कि इन सभी 35 अतिरिक्त हल्कों के बस्ते जमा कर दिए गए हैं। अब लेखपाल केवल अपने मूल हल्के का काम कर रहे हैं।
महामंत्री शिवशंकर यादव ने कहा कि मांगों के समर्थन में यह निर्णय लिया गया है। अभी इसका असर कम दिखाई दे रहा है, लेकिन दो-चार दिन में तहसील पहुंचने वाले फरियादियों की संख्या और उनकी परेशानी बढ़ सकती है।