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नेताओं ने किया धोखा, अब जनता के पास मौका

Fri, 10 Feb 2017 10:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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जनपद न्यायालय में चाय की दुकान पर चुनाव का चर्चा करते अधिवक्ता। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिला बने 28 साल हो गए, लेकिन विकास के मापदंडों पर हम काफी पीछे हैं। इसके लिए जनप्रतिनिधियों की उदासीनता मुख्य वजह है। अगर सही हाथों में प्रतिनिधित्व होता तो पिछड़ेपन की कसक नहीं रहती। नेताओं ने जिले के साथ धोखा किया है, अब मौका जनता के पास है। अगर विकास चाहिए तो अच्छे व्यक्ति और विकासपरक सोच वाले को ही चुनना होगा। यह निचोड़ था शुक्रवार को न्यायालय परिसर में चाय की दुुकान पर चुनावी चकल्लस में मशगूल अधिवक्ताओं की चर्चा का।
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अधिवक्ताओं की यह टोली पूरे रौ में थी। व्यक्तित्व-कृतित्व के आधार पर उम्मीदवारों की योग्यता टटोल रही थी। वर्तमान प्रत्याशियों पर चर्चा हुई तो अतीत के उन जुझारु तेवर वाले नेताओं का भी जिक्र करने से नहीं हिचके, जिन्होंने जिले के विकास को एक पहचान दी। वरिष्ठ अधिवक्ता विभूति प्रसाद पाठक ने कहा कि जनपद को अस्तित्व में आए 28 वर्ष होने को हैं, मगर विकास अब भी शून्य है। विकास के लिए जरूरी स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही क्षेत्र पिछड़े हुए हैं। किसी जनप्रतिनिधि ने यहां के विकास के बारे में नहीं सोचा। रूपनरायन पांडेय व ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि हर सरकारें महिलाओं को हक देने की बात करती हैं, मगर यह घोषणा तक ही सिमट जाता है। हिस्सेदारी के हिसाब से महिलाओं को भी 33 प्रतिशत सीटों पर चुनाव लड़ाना चाहिए। चुनाव में महिलाओं की भागीदारी होने से कुछ बदलाव आवश्यक आएगा।
नागेंद्र त्रिपाठी, देवेंद्र शुक्ल व शकूर मोहम्मद ने कहा कि आज परिवाद की राजनीति हो गई। जिसकी वजह से देश की तरक्की व विकास में रुकावट है। परिवारवाद मुक्त पार्टी के प्रत्याशी को वोट दिया जाएगा। कन्हैया पांडेय, इसराक अहमद खां और विनोद कुमार यादव ने कहा कि जिला विकास शून्य है। देश आजाद होने के बाद से अब तक अन्य जिलों की भांति यह पर विकास को लेकर कोई भी जनप्रतिनिधि संजीदा होता तो बहुत कुछ बदल गया होता, लेकिन चुनाव जीते पांच वर्ष भ्रष्टाचार से धन अर्जित किए और चले गए। जो भी काम करने वाला न हो उसे नकारकर दूसरे को चुना जाए। परिवर्तन करने से बदलाव आएगा और विकास होगा।
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