मेडिकल कॉलेज में मात्र दो लोगों ने कराया है देहदान का पंजीयन
मेडिकल कॉलेज में है केवल पांच मृत मानव शरीर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं को अध्ययन के लिए लावारिस मिलीं लाशों का ही भरोसा है। देहदान के प्रति जागरूकता के अभाव में छात्र-छात्राओं को अध्ययन में मृत मानव शरीर की कमी है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पुलिस विभाग को पत्र लिखकर लावारिस लाशों का सुपुर्द करने की मांग की है।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को मृत मानव शरीर पर अध्ययन कराया जाता है। एक बैच में करीब 100 छात्र-छात्राएं हैं। प्रत्येक वर्ष तीन से चार मृत मानव शरीर की आवश्यकता होती है। अध्ययन के दौरान शरीर के एक-एक अंगों को मेडिकल छात्र-छात्राओं को दिखाया जाता है। जबकि अंत में हड्डियों को सुरक्षित रखा जाता है।
मेडिकल कॉलेज में तीसरे सत्र में एमबीबीएस में प्रवेश हुआ है। लेकिन अब तक एक भी व्यक्ति ने देहदान नहीं किया है। जिले में लावारिस लाशें अधिक मिली हैं, जिसके सहारे अध्ययन कराया जा रहा है। एनॉटामी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हसमतुल्लाह ने बताया कि एनॉटामी विभाग में पांच मानव मृत शरीर हैं। देहदान के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।
दो लोगों ने कराया देहदान का पंजीयन
जिले के महादेवा निवासी संत बहादुर सिंह ने हाल ही मेडिकल कॉलेज के एनॉटामी विभाग में देहदान का पंजीयन कराया है, जबकि इसके पहले वृद्धाश्रम पुरानी नौगढ़ के एक व्यक्ति ने पंजीयन कराया था। ढाई साल में केवल दो लोगाें ने देहदान का पंजीयन किया है।
मेडिकल कॉलेज में किसी ने नहीं कराया पंजीयन
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने देहदान के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन मेडिकल कॉलेज के किसी भी अधिकारी ने देहदान पंजीयन नहीं कराया है। चर्चा है कि यदि जिम्मेदारों ने स्वयं पंजीयन कराया होता तो समाज में अच्छा संदेश जाता।