फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: छेड़खानी, मारपीट, बलवा व पॉक्सो एक्ट के आरोपियों की जमानत खारिज

Mon, 16 Oct 2023 10:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
जोगिया थानाक्षेत्र के एक गांव में 27 जून 2023 को हुई थी घटना
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट प्रमोद कुमार सिंह ने मारपीट, बलवा, दंगा, जानमाल की धमकी, छेड़खानी, दलित उत्पीड़न पॉस्को एक्ट के दो अभियुक्तों की जमानत खारिज कर दी है। घटना जोगिया थानाक्षेत्र के एक गांव में 27 जून 2023 को घटित हुई थी। कोर्ट ने इसके आरोपी प्रभुदयाल यादव और दीपक दयाल की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
जोगिया थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी ने तहरीर दी कि 27 जून 2023 को शाम छह बजे उसके ही गांव की एक बरात जा रही थी। अचानक बैंडबाजा बजाने को लेकर कुछ कहासुनी हो गई थी। प्रभुयादव, विशाल यादव, शुशांत दयाल यादव, पप्पू यादव, प्रेमदयाल, दीनदयाल, अनूप, सनूप व योगेश ने मिलकर उसे, उसके भाई रवि व उसकी बहन पीड़िता को मां-बहन की गालियां दीं। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उन तीनों को ईंट, पत्थर, डंडे व चाकू से बुरी तरह मारा-पीटा। इससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई। उसके भाई व बहन के शरीर पर चोटें आई तथा उसकी बहन पीड़िता जब भाग रही थी तो उसे पकड़कर गंदी निगाह से दुपट्टा खींच लिया और गाली-गुप्ता व जातिसूचक शब्दों के साथ कहा कि उसे नहीं छोड़ेंगे।
विज्ञापन

गांव के तमाम लोगों ने घटना को देखकर बीच-बचाव किया। इससे उनलोगों की जान बची। पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना शुरू की और अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। आरोपी अभियुक्तों में से दो अभियुक्तों प्रभुदयाल यादव एवं दीपक यादव ने न्यायालय में अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया।
विज्ञापन

पीड़ित पक्ष की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता कृपा शंकर त्रिपाठी एवं विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो एक्ट पवन कुमार कर पाठक ने अभियुक्तों की अग्रिम जमानत प्रार्थना का विरोध करते हुए खारिज करने की मांग की। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद पत्रावली का सम्यक परिशीलन कर न्यायालय में दिए पीड़िता के बयान, उसके आयु प्रमाणपत्र, चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट, मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों व लगाए गए आरोपों की गंभीरता व विधिक दंड को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने जमानत का पर्याप्त आधार नहीं पाया। न्यायालय ने अभियुक्तों का अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें