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मारपीट में घायल मजदूर की मौत

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जिला अस्पताल पर कोल्हुआ गांव के ग्रामीणों का भीड - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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फोटो-54, 55
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इलाज के अभाव में गई मजदूर की जान
16 अक्तूबर की रात खाना खाने के दौरान हुआ था विवाद
मोहाना थाना क्षेत्र के जुबलीपुर गांव में सड़क निर्माण में लगा था मजदूर
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर/बर्डपुर। मोहाना थाना क्षेत्र के जुबलीपुर गांव में सड़क निर्माण के काम में लगे मजदूरों में खाने को लेकर 16 अक्तूबर की रात में मारपीट में हुई थी। इस दौरान घायल एक मजदूर की सोमवार की देर रात जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जाता है कि उसके पास इलाज के लिए रुपये नहीं थे। इसकी वजह से उसका इलाज एसपीजीआई नहीं हो सका। क्योंकि मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरों ने एसपीजीआई रेफर कर दिया था। लेकिन लोग उसे जिला अस्पताल में इलाज के लिए लेकर चले आए थे। मौत का कारण गंभीर चोट बताया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सदर थाना क्षेत्र के कोल्हुआ द्वितीय गांव निवासी रामहंस (32) मजदूरी करता था। पत्नी की मौत पहले हो चुकी है। दो बेटियां हैं। इसमें 12 साल की रेशमा और आठ साल की रुक्मिणी है। बताया जा रहा है कि नौ अक्तूबर को उसका थाना क्षेत्र के मरचहवा गांव निवासी मुनीम का काम करने वाले बलिराम के साथ काम करने मोहाना थाना क्षेत्र के जुबलीपुर गांव में गया हुआ था। उसके साथ चार अन्य मजदूर भी काम करते थे। 16 अक्तूबर की रात खाना खाने के दौरान मजदूरों में मारपीट हुई। सुबह गांव के लोग गंभीर हाल में उसे इलाज के लिए बर्डपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। जहां हालत गंभीर देखकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। मेडिकल कॉलेज में गंभीर हाल में 21 अक्तूबर को डॉक्टरों ने लखनऊ पीजीआई रेफर कर दिया। रुपये का अभाव व घर पर कोई जिम्मेदार न होने के कारण बलिराम जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई। मौत की जानकारी के बाद भारी संख्या में गांव के लोग पोस्टमार्टम हाउस व जिला अस्पताल पहुंच गए। माहौल बिगडने न पाए, इसे देखते हुए मौके पर पुलिस फोर्स भेज दिया गया और लोगों को समझाया गया। एसओ मोहाना मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बलराम की तहरीर पर केस दर्ज कर मामले की जांच की रही है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धारा बदली जाएगी।
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पिता की मौत के बाद दोनों बेटियां हुई अनाथ
12 वर्षीय रेशमा और आठ वर्षीय रुक्मिणी के सिर से पहले मां का साया उठ चुका है। अब पिता की मौत के बाद दोनों बेटियां अनाथ हो गई है। पिता के साथ-साथ मां का प्यार देने वाला रामहंस हमेशा के लिए बेटियों से दूर हो गया। दोनों को यह पता था कि उसे पापा काम करने गए हैं और जल्द ही लौटेंगे, लेकिन मंगलवार को जब उन्हें मौत के बारे में जानकारी मिली तो उनका रो-रोकर बुरा हाल था। पिता ही उनकी देखरेख करता था। ग्रामीणों का कहना था कि पत्नी की मौत के बाद से ही रामहंस बच्चों का ख्याल अधिक रखता था। कहीं बाहर नहीं रहता था। वह जब भी कहीं जाता था तो गांव की एक महिला के घर बेटियों को छोड़कर जाता था।
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