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Siddharthnagar News: वीआईपी पास के साथ महोत्सव में घुसने को करते रहे जद्दोजहद

Sat, 03 Feb 2024 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर महोत्सव में अव्यवस्था का आलम ऐसा था कि जिन्हें वीआईपी पास जारी हुआ था वह सीट छोड़िए कार्यक्रम में घुसने के लिए जद्दोजहद करते दिखे। अधिकांश पास धारकों का आरोप था कि जब सीट की व्यवस्था नहीं थी तो वीआईपी पास ही क्यों जारी किए गए। महोत्सव स्थल के प्रवेश द्वार पर इन्हीं पास धारकों के प्रतिदिन अंदर घुसने के दौरान ही तनातनी और कहासुनी की स्थिति उत्पन्न होती रही।
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पिछले वर्ष सिद्धार्थनगर महोत्सव में प्रवेश पास के लिए भाजपा के एक पदाधिकारी और एक जिला स्तरीय अधिकारी के बीच कहासुनी हो गई थी। इस तनातनी की गूंज महोत्सव में आए सीएम तक पहुंची थी। जिसके बाद मामला शांत हो गया था। जहां पिछले वर्ष कम वीआईपी पास जारी होने से बवाल हुआ था, वहीं इस बार सीट से अधिक वीआईपी पास जारी कर देने से भी महोत्सव में अफरा-तफरी का माहौल रहा। कार्यक्रम में वीआईपी पास लेकर पहुंचे पवन पांडेय, सुनील अग्रहरि प्रवेश द्वार से अंदर तो गए लेकिन सीट नहीं मिलने पर वापस लौट आए। वहीं अंदर सीट नहीं होने और भीड़ बढ़ जाने पर पास लेकर पहुंचे कुछ लोगों को महोत्सव स्थल पर गेट से ही वापस कर दिया गया।
अलग-अलग दिनों के बने थे पास
पांच दिवसीय सिद्धार्थनगर महोत्सव में अलग-अलग दिनों के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वीआईपी पास बने थे। इनमें सबसे अधिक पास चौथे दिन कैलाश खेर और पांचवें व अंतिम दिन भोजपुरी स्टार अक्षरा सिंह के कार्यक्रम के लिए पास जारी हुए थे। बताते है कि अंतिम दिन अक्षरा सिंह के कार्यक्रम के लिए वितरण के दौरान पास कम पड़ जाने पर पिछले दिनों के तारीख काटकर उन्हें अंतिम दिन के लिए वीआईपी पास जारी कर दिया गया। इससे अंतिम दिन भीड़ बढ़ने पर बवाल की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
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अधिकारियों के मनोरंजन का रहा केंद्र
सपा के पूर्व विधायक विजय पासवान कहते है कि महात्मा बुद्ध के नाम से बने जिले का स्थापना समारोह अब अधिकारियों के मनोरंजन का केंद्र बन गया है। पहले जहां यह कार्यक्रम जिले की सांस्कृतिक पहचान एवं लोगों को जानकारी देकर जागरूक करने के लिए जाना जाता था, अब कार्यक्रम का यह अभिप्राय पूरी तरह बदल गया है। प्रशासन स्थानीय लोगों को सुविधा देने में नाकाम रहा ही, साथ ही कार्यक्रम स्थल पर पूर्व में बने मीडिया गैलरी को पीछे कर आगे अधिकारियों ने स्वयं कब्जा कर लिया था।
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