सिद्धार्थनगर/बांसी। तेजी से लुढ़कते पारे ने आम जनजीवन को अस्त-व्यवस्त कर दिया है तो फसलों पर भी दुष्प्रभाव पड़ने लगा है। पाले की आशंका से किसान सहम गए हैं। कृषि विशेषज्ञ गोष्ठी कर किसानों को बचाव के टिप्स दे रहे हैं। गुरुवार को मिठवल ब्लाक के प्रतापपुर गांव में स्थित कृषि विभाग के केंद्र पर गुरुवार को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसानों को फसलों को पाला से बचाव के बारे में जानकारी दी गई।
बतौर मुख्य अतिथि कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह ने किसानों को पाले व कोहरे से फसलों को बचाने का गुर सिखाया। उन्होंने कहा कि शीतलहर एवं पाले से सर्दी के मौसम में सभी फसलों को थोड़ा नुकसान होता है। टमाटर, मिर्च, बैगन आदि सब्जियों, पपीता व केले के पौधे, मटर, चना, सरसों, जीरा और धनिया आदि फसलें सबसे अधिक प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि पाले के प्रभाव से फसलों, फलों व सब्जियों के फल झड़ने लगते हैं। प्रभावित फसल का हरा रंग समाप्त हो जाता है और पत्तियों का रंग मिट्टी के रंग जैसा दिखता है। ऐसे में पौधों के पत्ते सड़ने से वैक्टीरिया जनित बीमारियों का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। पत्ती, फूल व फल सूख जाते हैं। फल के ऊपर धब्बे पड़ जाते हैं व स्वाद भी खराब हो जाता है। उन्होंने बताया कि फलदार पौधे पपीता, आम आदि में इसका प्रभाव अधिक पाया गया है। गोष्ठी में रमेश, राजकुमार और दिनेश आदि किसान मौजूद रहे।