मछली पालन करने वालों का भी बनेगा केसीसी
सिद्धार्थनगर। मछली पालन कर रहे हैं और कार्य में आर्थिक समस्या उत्पन्न हो रही है तो अब राहत मिल सकती है। मछली पालन पर भी किसान क्रेडिट कार्ड ऋण पा सकेंगे। आर्थिक संकट के कारण कारोबार पर असर न पड़े, उसे ध्यान में रखते हुए शासन ने यह कवायद शुरू की है। मत्स्य विभाग को जिम्मेदारी है कि वह किसानों का केसीसी बनाएं। प्रचार-प्रचार के जरिए उन्हें योजना के बारे में जानकारी दें, जिससे अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सके।
केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, जिससे किसानों की आय बढ़े और वे तरक्की करें। इसमें मछली पालन को भी सरकार बढ़ावा दे रही है। जैसे तालाब खुदवाने के लिए अनुदान राशि दे रही है। फिर मछली पालन करने वालों के सामने कभी- कभी आर्थिक संकट आ जाता है, जिससे कारोबार पर असर पड़ता है।
जैसे खेती करने वाले किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना चल रही थी, ठीक उसी प्रकार मछली पालन करने वालों के लिए केसीसी योजना सरकार ने शुरू की है। उससे कारोबार करने वाला किसान जब चाहे बैंक से ऋण लेकर अपना कार्य कर ले और धन के अभाव में कारोबार न रुके। इसमें पट्टा और निजी तालाब पर भी मछली पालन करने वालों को लाभ मिलेगा। बशर्ते इसके लिए थोड़ा अलग प्रकार का नियम है। इसके मिलने से कारोबार में गति आएगी और किसानों की तरक्की के रास्ते खुलेंगे।
छह हजार केसीसी बनाने है विभाग का लक्ष्य
विभाग के मुताबिक, शासन से जिले को छह हजार किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने का लक्ष्य मिला है। मछली पालन करने वाले जागरूक हों और उन्हें योजना का लाभ मिले, उसके लिए प्रचार- प्रसार के जरिए उन्हें योजना के बारे में जानकारी दी जाएगी। ऋण के फायदे के बारे में बताया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके।
इतने रकबे पर मिलेगी इतनी धनराशि
एक तालाब का आकार एक-दो बीघा से कम नहीं होगा। इसमें एक हेक्टेयर रकबे के तालाब पर 2.80 लाख रुपये की केसीसी बनेगा। इसमें रकबे के हिसाब से धनराशि कम और अधिक होगी। ऋण अदायगी का नियम किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड की तरह से होगी।
आवेदन में यह अनिवार्य
आवेदनकर्ता को अगर निजी भूमि पर उसका तालाब है तो उसे उस रकबे पर का खसरा, खतौनी, देना होगा, जबकि अगर पट्टे का तालाब है तो तहसील प्रशासन की ओर से जारी 10 वर्ष के पट्टे का प्रमाणपत्र लगाना होगा। इसके साथ ही अगर पिछड़ी और अनुसूचित जाति के हैं तो जाति प्रमाण पत्र, निवासी, आय, पैक कार्ड, बैंक पासबुक की छाया प्रति, आवेदन का फोटा, तालाब का फोटो के साथ आवेदन करना होगा। यह आवेदन ऑफलाइन मत्स्य विभाग कार्यालय में कर सकते हैं।
21 हेक्टेयर भूमि पर मत्स्य विभाग तालाब पर दे चुका है अनुदान
जिले में 21 हेक्टेयर भूमि पर मछली पालन के लिए मत्स्य विभाग तालाब बनाने के लिए अनुदान दे चुका है। इस रकबे पर तालाब बनने के साथ ही मछली पालन का कार्य शुरू हो चुका है। पालन करने वालों को अनुदान की राशि भी मिल चुकी है।
खेती करने वाले किसानों की तरह से मछली पालन पर भी किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने की योजना शुरू हुई है। इसमें मछली पालन करने वालों को कार्ड बनवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे उन्हें योजना की जानकारी मिले और उसका लाभ उठा सकें।
- पुष्पा त्रिपाठी, जिला मत्स्य अधिकारी