शिक्षा माफिया राकेश एक बार फिर निलंबित
सिद्धार्थनगर। फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी दिलाने वाले गिरोह के सरगना राकेश सिंह के जेल जाने के बाद विभाग ने उसे निलंबित कर दिया है। सरगना पर पुलिस की ओर से कसे गए शिकंजे से कई लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। राकेश ने फर्जीवाड़ा में शामिल कुछ बाबुओं के नाम भी उगले हैं। ऐसे में सुस्त पड़ी कार्रवाई की रफ्तार एक बार फिर गति पकड़ने की उम्मीद है। एसटीएफ और पुलिस की टीम भर्ती से जुड़े फाइल को खंगालना शुरू कर दिया है।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी दिलाने का खेल, शिक्षक राकेश सिंह के आने के बाद शुरू हुआ। वर्ष 2018-19 में शिक्षकों की भर्ती के मामले में फर्जीवाड़ा होने की शिकायत शासन तक पहुंची तो उसकी जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। जांच में जुटी एसटीएफ गोरखपुर की टीम ने बड़े पैमाने पर फर्जी शिक्षकों को बेनकाब करते हुए साक्ष्य निकाले। जांच में जुटी टीम जब तह तक गई तो बढ़नी ब्लॉक खड़कुईया नानकार गांव में बतौर शिक्षक तैनात राकेश सिंह निवासी कुंईचवर थाना भाटपार रानी जनपद देवरिया गिरोह का सरगना निकला। जांच में जुटी एसटीएफ ने उसे दबोच लिया।
कुछ दिन बाद जमानत पर जेल से बाहर आया और फिर बहाल होकर नौकरी करने लगा। मामले की जांच जारी रही। 28 मई को गिरोहबंद अपराध के मामले में गैंगस्टर की कार्रवाई हुई। 29 को मोहाना थाने की पुलिस ने अपने यहां दर्ज हुए तीन मामलों में दबोचा। मंगलवार को एक बार फिर जेल जाने और गैंगस्टर की कार्रवाई होने के बाद बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने उसे निलंबित कर दिया है।
दूसरी ओर राकेश सिंह के पकड़े जाने के बाद कई लोगों की गर्दन पर एक बार फिर तलवार लटक रही है। क्योंकि उसने अब तक की जितने भर्ती में फर्जीवाड़ा किया है, उस दौरान उसने कुछ संलिप्त बाबुओं के नाम पुलिस के समक्ष उगले हैं। बताया यह भी जा रहा है कि कुछ बाबू मौजूदा समय में कार्यालय में कार्यरत हैं। उनकी बेचैनी बढ़ गई थी। माना जा रहा है कि जल्द ही उन पर भी गाज गिरेगी। वहीं, सुस्त पड़ी जांच की रफ्तार एक बार फिर गति पकड़ सकती है। इस संबंध में एएसपी सुरेशचंद रावत ने बताया कि मामले की जांच जारी है। फर्जीवाड़ा करने वाले जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में आएंगे। वहीं, बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि राकेश सिंह को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
राकेश सिंह की बहाली पर भी उठा था सवाल
फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी दिलाने जैसे संगीन अपराध में आरोपी और जेल से रिहा होने के कुछ दिन ही बाद राकेश सिंह को बहाल कर दिया गया था। जबकि एसटीएफ अभी भी मामले की जांच कर रही है। राकेश सिंह को गिरोह का सरगना भी बताया। उसके बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार क्यों उस पर इतना मेहरबान हो गए और दबाव आ गया कि उसे बहाल कर देना पड़ा। न तो जांच बंद हुई थी और न ही कार्रवाई का दौर रुका था।