न्याय आधारित शांति ही सबसे उचित : डॉ. शारदा
राजकीय महाविद्यालय पचमोहनी खेसरहा में हुआ अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। राजकीय महाविद्यालय पचमोहनी खेसरहा में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें विदेश से आमंत्रित वक्ताओं ने बुद्ध दर्शन व शांति पर ऑनलाइन माध्यम से विचार व्यक्त किया। मुख्य वक्ता जापान के विदेश मंत्रालय के विश्लेषक डॉ. यासुयुकि इशिदा, लुंबिनी विवि नेपाल के हेड एवं प्रोफेसर डॉ. फनींद्र कुमार नेउपाने, डॉ. शारदा पौडेल ने अपने विचार ऑनलाइन मंच पर साझा किया।
डॉ. नेउपाने ने कहा कि शांति का स्थान सभी परिस्थितियों में सबसे ऊपर है। इसमें मानसिक शांति ही सभी परिस्थितिजन्य कठिनाइयों को दूर कर सकती है। बुद्ध ने कुल 80 प्रकार से अधिक चेतना के स्वरूप बताएं हैं। डॉ. शारदा ने बताया कि शांति सकारात्मक व नकारात्मक स्वरूप में मानव स्वाभाव में दिखाई देती है। जिसमें से न्याय आधारित शांति ही सबसे उचित है। नेपाल में नब्बे के दशक में हुए गृहयुद्ध में बुद्ध का शांति संदेश उससे उबरने में सहायक रहा है। टोक्यो जापान के डॉ. यासुयुकि इशिदा ने जापान में बौद्ध धर्म के प्रकारों की चर्चा की। उन्होंने कहा जापान के 35 प्रतिशत जनसंख्या ने बौद्ध धर्म को थेरवेद महायान और इसोटेरिक तरीके से अपने जीवन में उतारा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान की अप्रत्याशित प्रगति में बौद्ध दर्शन के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। राजकीय महाविद्यालय अंबेडकरनगर के प्रो. राजेश कुमार ने बौद्ध दर्शन का भारतीय दृष्टिकोण लोगों के समक्ष रखा। कार्यक्रम में शिलॉग विश्वविद्यालय के डॉ. रिचर्ड, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की डॉ. नीता, पटना की डॉ. मंजुला, अग्रसेन महिला महाविद्यालय आजमगढ़ के प्रोफेसर डॉ. शैलजा, निशा, डॉ. पूनम, डॉ. मधुरिमा, डॉ. उषा, डॉ. गजाला, महजबीन, प्रो. अवधेश, नोएडा से डॉ. कनक कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़े रहे। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रकाश ने किया। इस दौरान डॉ. अजय सोनकर, संतोष, शब्बीर और विद्यार्थी प्रोजेक्टर के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।