- जिले में करीब एक हजार शादियों के बीच सिलिंडर किल्लत, विकल्पों के सहारे चल रही व्यवस्था
वर-वधू दोनों पक्षों के लिए बनी चुनौती
सिद्धार्थनगर। अगले हफ्ते शुरू हो रहे सहालग में इस बार शादियों की रौनक के बीच रसोई गैस की किल्लत बड़ी चुनौती बन गई है। जिले में इस सीजन में करीब 900 से एक हजार शादियां होने का अनुमान है। ऐसे में रसोई गैस की किल्लत ने वर-वधू दोनों पक्षों के लिए मुयिकलें बढ़ा दी हैं। जिला स्तर पर गैस की मांग और सप्लाई के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता दिखा रहे हैं।
सहालग के दौरान जिले में रोजाना कॉमर्शियल सिलिंडरों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले 30-40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, लेकिन सप्लाई में बढ़ोतरी 10-15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो पाती। वहीं वर्तमान में अन्य दिनों की अपेक्षा काॅमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति बेहद कम मात्र 20 फीसदी हो रही है। ऐसे में यही अंतर किल्लत और अव्यवस्था की मुख्य वजह बन रहा है। कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े मोहम्मद आरिफ बताते हैं एक बड़े प्रोग्राम में 20-25 सिलिंडर लगते हैं, लेकिन इस समय 10-12 ही मिल पा रहे हैं। मजबूरी में लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसी तरह कैटर सुनील गुप्ता कहते हैं इंडक्शन और इलेक्ट्रिक प्लेट से पूरा काम नहीं चल सकता। गैस का विकल्प है, लेकिन पूरी तरह समाधान नहीं है।
मैरिज लॉन संचालकों के अनुसार, जिले में करीब 150 से अधिक मैरिज लॉन/बैंक्वेट हॉल सक्रिय हैं, जिनमें अधिकांश की बुकिंग फुल है। एक संचालक बताते हैं, गैस की अनिश्चितता के कारण हमें बैकअप के तौर पर लकड़ी-कोयला और अतिरिक्त चूल्हे लगाने पड़ रहे हैं, जिससे जोखिम भी बढ़ गया है। कुछ जगहों पर कॉमर्शियल सिलिंडर तय दर से 800 से एक हजार रुपये अधिक में बेचे जा रहे हैं। छोटे कैटर्स और सीमित बजट वाले परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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सबसे बड़ा सवाल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर उठ रहा है।
कैटर्स का आरोप है कि कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई सीमित है जबकि कुछ जगह घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल व्यावसायिक कामों में हो रहा है। इससे असंतुलन और बढ़ रहा है। हालांकि, एक गैस एजेंसी संचालक का कहना है डिमांड अचानक बढ़ जाती है। हमारे पास जितनी सप्लाई आती है, उसी के हिसाब से वितरण किया जाता है। प्राथमिकता तय करना मुश्किल होता है।
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सीमित हो रहा मेन्यू
इसका असर मेन्यू पर साफ दिख रहा है। पहले जहां 20-25 आइटम परोसे जाते थे, अब उन्हें घटाकर 12-15 तक सीमित किया जा रहा है। इटवा क्षेत्र के अभिभावक राजेश मिश्रा कहते हैं, बेटी की शादी में पहले बड़ा मेन्यू रखा था, लेकिन अब कुछ आइटम हटाने पड़े हैं। गैस के इंतजाम में ही अलग खर्च हो रहा है। लकड़ी और कोयले की कीमतों में 20-25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, बिजली और जनरेटर के खर्च से कुल लागत में 15-30 प्रतिशत तक इजाफा हो रहा है।
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मांग और आपूर्ति
शादियां: 900-1000
प्रति आयोजन जरूरत : 15-30 सिलिंडर
मांग में बढ़ोतरी : 30-40 प्रतिशत
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कहां है गड़बड़ी
कॉमर्शियल सिलिंडर की सीमित सप्लाई
घरेलू सिलिंडर का दुरुपयोग
रिफिलिंग/ट्रांसपोर्ट में देरी
पीक सीजन की प्लानिंग का अभाव
जुगाड़ के विकल्प और असर
- लकड़ी/कोयला : सस्ता नहीं, धीमा और प्रदूषण
- इलेक्ट्रिक : खर्चीला, सीमित उपयोग
- मेन्यू कटौती : प्रतिष्ठा पर असर
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गैस की मांग और आपूर्ति की स्थिति
जिले के सभी 51 एजेंसियों पर कुल 5,89,351 घरेलू गैस के उपभोक्ता हैं। वहीं, कामर्शियल गैस के एक हजार उपभोक्ता है। इनमें इंडेन, एचपी व भारत गैस के उपभोक्ता शामिल हैं। रविवार को घरेलू गैस के 11,868 उपभोक्ताओं को सिलिंडर वितरित किया गया, जबकि सोमवार को कोई वितरण नहीं हुआ है। वहीं, गैस की किल्लत शुरू होने के बाद रविवार को ही पहली बार उपभोक्ताओं के सापेक्ष काॅमर्शियल गैस सिलिंडर की 20 फीसदी आपूर्ति मिली है। जो आगे भी जारी रहेगी, लेकिन यह वर्तमान मांग के सापेक्ष बेहद कम है। इसमें होटल व रेस्टोरेंट व्यवसायी की आवश्यकताओं की भरपाई मुश्किल होगी, जिससे इन काॅमर्शियल गैस के भरोसे सहालग में शादी विवाह की रसोई निपटाना असंभव है।
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शादी विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों के लिए गैस आपूर्ति की कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है। नियमानुसार घरेलू गैस उपभोक्ताओं को ही सिलिंडर की आपूर्ति हो रही है, जिन्हें जरूरत हो वह बिना सब्सिडी वाले काॅमर्शियल गैस खरीद कर उपयोग कर सकते हैं। अभी मात्र 20 फीसदी काॅमर्शियल गैस की आपूर्ति शुरू हुई है।
- देवेंद्र प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी