अपने सदस्यों को सहेजने में नाकाम रही सपा, मिली करारी हार
- सपा के समर्थन से जीते थे 15 सदस्य, मिले पांच मत
- भाजपा ने निर्दलीय समेत विपक्षी सपा के मतों में की सेंधमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्घार्थनगर। पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के सर्वाधिक 15 सीटों पर जीत का परचम लहराने वाली सपा अध्यक्ष पद के चुनाव में धड़ाम हो गई। सपा प्रत्याशी सिर्फ पांच मत पाकर चुनाव हार गईं। इससे साफ हो गया कि सपा अपने सदस्यों को ही सहेजने और उन्हें पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराने में असफल रही।
जिला पंचायत में सपा के 15, भाजपा के नौ, निर्दलीय 15, कांग्रेस के तीन, बसपा के दो और अपना दल एस का एक सदस्य चुनाव जीते था। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में मात्र नौ सीट पर जीत हासिल करने वाली भाजपा प्रत्याशी ने 40 सदस्यों को अपने पाले में खड़ा कर दिया। भाजपा प्रत्याशी ने निर्दलीय समेत कांग्रेस, बसपा के साथ सपा के सदस्यों में भी सेंधमारी करने में सफल रही। जबकि सपा प्रत्याशी अपने सदस्यों को ही सहेजने में नाकाम रही। उसे 15 में सिर्फ पांच मत ही मिल सके। पार्टी कार्यकर्ताओं की मानें तो सपा प्रत्याशी अपने सदस्यों से भी संपर्क नहीं कर पाए जिससे चुनाव में सपा प्रत्याशी की रणनीति असफल साबित हुई। नतीजा रहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी सपा चुनाव नहीं जीत सकी और भाजपा ने बड़ा उलटफेर करते हुए जीत का परचम लहरा दिया।
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पांच में किसके शामिल हैं मत
सपा प्रत्याशी को मिले पांच मत किसके थे, यह चर्चा में रहा। यह मत सपा समर्थित सदस्यों के थे, अथवा निर्दलीय या फिर बसपा और कांग्रेस के सदस्यों के मत इसमें शामिल हैं। चुनाव में कई दलों के सदस्यों की निष्ठा पर सवाल खड़े होते रहे, जिससे लोग तरह-तरह के कयास लगाते नजर आएं। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद भी लोग चर्चा करते दिखे कि कौन किसके साथ रहा।
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भाजपा की गाड़ियों से उतरे विपक्षी सदस्य
मतदान के दौरान कई तरह के नजारे सामने आए। कलेक्ट्रेट गेट के सामने तक सदस्यों को पहुंचाने वाली लक्जरी गाड़ियों पर भाजपा के झंडे लगे थे लेकिन उनसे उतरने वाले सदस्य निर्दलीय अथवा विपक्षी दल से संबंधित रहे। यहां तक कि विपक्षी जिला पंचायत सदस्यों के साथ जिनमें अधिकांश महिलाएं शामिल थीं, उन्हें मतदान करने के लिए मिले सहयोगियों में भाजपा के वफादार कार्यकर्ता शामिल रहे।