न किसी वीआईपी का दौरा था और न कोई विशेष आयोजन। बावजूद पूरा नगर मंगलवार को जाम की जद में ऐसा जकड़ा कि सड़कों पर वाहन रेंगते रहे। करीब दो घंटे तक मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रही।
अफसरों की गाड़ियां फंसी, एंबुलेंस भी जाम से जूझती रही। अव्यवस्था की हद यह थी कि लोग अपने भरोसे ही जाम से निकलते रहे। मौके पर न तो कोई पुलिस कर्मी था और यातायात महकमे से कोई जिम्मेदार। जाम की विभिषिका झेल रहे लोग अफसरों को कोसते रहे।
अमूमन हर किसी के मुंह से यह निकलता रहा कि हे भगवान, कब खत्म होगा यह जाम। नगर के मध्य से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर जाम की शुरुआत दोपहर करीब 12 बजे पैसेंजर ट्रेन के आने पर हुई। नौगढ़ तहसील के समीप स्थित रेलवे क्रांसिंग को ट्रेन गुजारने के लिए बंद कर दिया गया। फिर तो वाहनों की कतार लगनी शुरू हुई तो थमने का नाम नहीं लिया।
एक तरफ बांसी तिराहे तक तो दूसरी तरफ नौगढ़ ब्लाक तक वाहनों का रेला लग गया। दो पहिया, चार पहिया वाहनों के साथ साइकिल सवार और पैदल राहगीर भी जूझते नजर आए। इसी बीच स्कूलों की छुट्टी होने से जाम की स्थिति और भी बिगड़ गई।
एक-एक कदम चलने में राहगीरों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी। यह समस्या इसलिए भी और थी कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई जिम्मेदार भी वहां मौजूद नहीं था। लोग अपने ढंग से चल रहे थे। नियमों को तोड़ रहे थे। नतीजा जाम कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही थी। दोपहर 12 बजे का यह जाम अपराह्न 2 बजे तक बरकरार रहा।
जाम में फंसे वाहन सड़कों पर रेंगते नजर आए। दो पहिया वाहन तो फिर भी जैसे-तैसे निकल जा रहे थे, मगर चार पहिया व अन्य बड़े वाहनों का हिलना भी दुश्वार था। हर कोई यातायात महकमे के जिम्मेदारों को कोसता दिख। गौर फरमाने की बात यह थी कि सामने ही तहसील कार्यालय था, जहां तहसील दिवस में बड़े अफसर भी जुटे थे, लेकिन वह पूरे दिन आम जनों की समस्या से अनजान बने रहे। यातायात प्रभारी अकमल खां ने बताया कि शहर में जाम लगे होने की जानकारी नहीं है। कोई जवान भी तैनात नहीं था तो इस बारे में पता करेंगे। जाम की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए समुचित कदम उठाए जाएंगे।