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Siddharthnagar News: पके आम संभालना मुश्किल, दो दिन में ही हो जा रहे खराब

Mon, 22 Jun 2026 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर के दुकान में रखा हुआ आम
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सिद्धार्थनगर। फलों के राजा आम की आवक बढ़ने के साथ बाजार गुलजार हैं लेकिन तेज गर्मी और उमस ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। पके हुए आम दो-तीन दिन के भीतर ही खराब होने लगे हैं। बिक्री से पहले ही फल सड़ने से दुकानदारों को रोजाना घाटा उठाना पड़ रहा है। नुकसान से बचने के लिए अब व्यापारी पहले की तुलना में कम मात्रा में आम मंगा रहे हैं।
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जिले के फल बाजारों में इन दिनों दशहरी, लंगड़ा, चौसा, सफेदा और अमरपाली किस्म के आमों की भरपूर आवक हो रही है। आम की मांग भी अच्छी है लेकिन भीषण गर्मी और बढ़ी नमी के कारण पके फल ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पा रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार दो दिन बाद ही आमों पर काले धब्बे पड़ने लगते हैं और गूदा अधिक नरम हो जाता है। कई फल अंदर से खराब निकल रहे हैं।
फल कारोबारी बताते हैं कि पहले चार से पांच दिन तक आम आसानी से बिक जाते थे लेकिन अब माल जल्दी निकालना पड़ता है। यदि बिक्री धीमी रही तो तीसरे दिन तक कई पेटियों के आम खराब होने लगते हैं। खराब फल ग्राहकों को नहीं बेचे जा सकते, इसलिए उन्हें अलग कर फेंकना पड़ता है।
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फल विक्रेता राजेश गुप्ता ने बताया कि रोजाना दो से तीन पेटी आम बिकते हैं लेकिन गर्मी के कारण प्रतिदिन कुछ किलो फल खराब हो जाते हैं। इससे सीधे कमाई पर असर पड़ रहा है। दुकानदार असलम खान ने बताया कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती आम को सुरक्षित रखना है। यदि एक-दो दिन में बिक्री नहीं हुई तो नुकसान तय है।
कारोबारियों का कहना है कि मंडी से आने के दौरान भी गर्मी का असर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट के दौरान तापमान अधिक होने से आम तेजी से पक जाते हैं। बाजार पहुंचने तक कई फल पूरी तरह पक चुके होते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत बेचना जरूरी हो जाता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अधिक तापमान और उमस फल के श्वसन की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। इससे आम तेजी से पकता है और उसका भंडारण समय कम हो जाता है। उचित तापमान और हवादार जगह नहीं मिलने पर सड़न की संभावना बढ़ जाती है।
नुकसान कम करने के लिए फल व्यापारी अब कम मात्रा में माल मंगा रहे हैं। कई दुकानदार पके और कच्चे आमों को अलग-अलग रख रहे हैं और सीधी धूप से बचाने के लिए तिरपाल और छायादार व्यवस्था का सहारा ले रहे हैं। इसके बावजूद हर दिन कुछ न कुछ नुकसान उठाना पड़ रहा है।

रोजाना कितना हो रहा नुकसान
- हर दुकान पर औसतन पांच से 15 किलो आम खराब
- गुणवत्ता के अनुसार 200 से 1000 रुपये तक का दैनिक नुकसान
- अधिक स्टॉक रखने वाले कारोबारियों को ज्यादा घाटा
- खराब फल अलग करने में भी अतिरिक्त मेहनत

इसलिए जल्दी खराब हो रहे आम
- 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान
- लगातार बढ़ी हुई उमस
- पके फलों से निकलने वाली एथिलीन गैस
- भंडारण की सीमित व्यवस्था
- खुले बाजार में बिक्री और धूप का प्रभाव
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ऐसे बचाएं आम को खराब होने से
- पके और कच्चे आमों को अलग-अलग रखें।
- आम को सीधे धूप में रखने से बचें।
- हवादार और ठंडी जगह पर भंडारण करें।
- एक के ऊपर एक अधिक पेटियां न रखें, इससे दबाव से फल खराब होते हैं।
- बहुत ज्यादा पके आमों की पहले बिक्री करें।
- खराब या सड़े आमों को तुरंत अलग कर दें, वरना आसपास के फल भी खराब हो सकते हैं।
- रात में आमों को तिरपाल या गीले बोरे से ढंककर रखें, लेकिन नमी अधिक न होने दें।
- फ्रिज में रखने से पके आम 4-5 दिन तक सुरक्षित रह सकते हैं।
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आम एक क्लाइमेक्टेरिक फल है जो पकने के बाद तेजी से एथिलीन गैस छोड़ता है। अधिक तापमान और उमस में यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है, जिससे फल जल्दी नरम होकर खराब होने लगता है। दुकानदारों को पके और कच्चे आम अलग-अलग रखने चाहिए। साथ ही आम को हवादार और छायादार स्थान पर रखने से उसकी गुणवत्ता कुछ दिनों तक बरकरार रखी जा सकती है।
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- विमल कांत, जिला उद्यान अधिकारी- सिद्धार्थनगर
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