अमरगढ़ शहीद स्थल और आमी नदी के उद्भव स्थल का किया निरीक्षण
डुमरियागंज। तहसील अंतर्गत 26 नवंबर 1858 की स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में शहीद हुए लोगों की याद में अमरगढ़ शहीद स्थल को भव्य राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने के लिए दिल्ली से आर्किटेक्ट और इंजीनियर की टीम मंगलवार देर रात डुमरियागंज पहुंची। टीम ने बुधवार सुबह अमरगढ़ शहीद स्थल और आमी नदी के उद्भव स्थल का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति देखी।
आर्किटेक्ट समीर और इंजीनियर नागेश सिंह यूपीआर एनएन कार्यदायी संस्था व सर्वेयर टीम ने निरीक्षण के बाद करीब 50 करोड़ से अधिक धनराशि का प्राक्कलन तैयार करने की बात कही। उन्होंने बताया कि पर्यटन के विकास का खाका तैयार किया गया है। इस दौरान उनके साथ एसडीएम व ईओ भी मौजूद रहे।
शहीद स्थल पर होंगे ये कार्य
टीम ने सर्वे के दौरान बताया कि डुमरियागंज परिवहन बस स्टैंड से माली मैंनहा को जोड़ने वाली दो लेन की सड़क बनेगी, जो शहीद स्थल से होकर गुजरेगी। शहीद स्थल पर सजीव पत्थरों पर चित्रकारी एवं प्रतिमाओं की शक्ल में उकेरा जाएगा। एक प्लेनेटोरियम बनेगा, जहां नक्षत्रशाला होगी और शहीदों को नमन करने के साथ खगोल दृश्य दिखाए जाएंगे। 101 फीट ऊंचाई पर तिरंगा झंडा, मशाल तथा शहीदों की याद में विशाल स्मारक बनेगा। योग केंद्र, जिम, बच्चों के लिए पार्क, झूला आदि बनेगा। विभिन्न जगह पांच गेट बनेंगे जो शहीदों की याद दिलाएंगे।
यह है इतिहास
अमरगढ़ शहीद स्थल जहां 26 नवंबर 1858 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम डुमरियागंज के पूर्वजों की ओर से लड़ा गया था। अंग्रेज सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस संग्राम में 80 भारतीयों को गोलियों से शहीद कर दिया गया था। सैकड़ों लोगों को राप्ती नदी में डुबो दिया गया था। आक्रोशित लोगों ने अंग्रेज अधिकारी गिल्फोर्ड को मार डाला था। इसके प्रमाण कैलिफोर्निया और ब्रिटिश गजेटियर में भी अंकित हैं। मौके पर अंग्रेज अधिकारी की कब्र और शहीद गेट बना है। इस क्रांतिकारी घटना के मुख्य प्रेरणास्रोत नाना साहब के भाई बालाराव व मोहम्मद नवाज थे। अमरगढ़ के वीर सपूतों को उनकी शहादत का सिला आज तक नहीं मिल पाया है।
आमी नदी को उसके उद्भव स्थल से जोड़ने का भी होगा काम
दिल्ली के आर्किटेक्ट समीर, इंजीनियर नागेश सिंह की टीम की ओर से सिकहरा कोहड़ा गांव स्थित आमी नदी के उद्भव स्थल का सर्वे किया गया। तालाब के मध्य में भगवान बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा लगेगी। भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित समस्त चित्र जो पत्थरों पर उकेरे जाएंगे तथा एक संग्रहालय भी बनाने की योजना है। उद्भव स्थल के तालाब को पक्का किया जाएगा। पानी आने जाने के लिए इनलेट आउटलेट बनाया जाए जाएगा। आस-पास के 20 से अधिक गांवों का जल ग्रहण क्षेत्र बनेगा। इस ताल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए नाव आदि का प्रयोग किया जाएगा, ताकि लोग नौका बिहार कर सकें। ताल के चारों तरफ पौधरोपण करने व बैठने की व्यवस्था होगी। कुर्सी मेज आदि स्थायी रूप से बनाई जाएगी। इस सभी कार्यों पर पांच करोड़ रुपये का प्राक्कलन बनेगा।