जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती सरिता।
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सिद्धार्थनगर। जिले में इंसेफेलाइटिस का कहर फिर तेज हो गया है। पिछले पांच माह में इंसेफेलाइटिस के 27 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें तीन की मौत हो चुकी है, जबकि 4 पीड़ित अभी भी जिला अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे है। हर साल कहर बरपाते इंसेफेलाइटिस को रोकने में स्वास्थ्य विभाग बेबस बना हुआ है। विभाग की कागजी कार्ययोजनाएं मूर्त रूप नहीं ले पा रही। कागजों से पूर्वांचल में मासूमों के लिए अभिशाप बने इसेंफेलाइटिस कहर बढ़ता ही जा रहा है।
नेपाल के सीतावर्ती जिलों के लिए इंसेफेलाइटिस अभिशाप साबित हो रहा है। इस बीमारी की चपेट में आने से सैकड़ों मरीजों की जान जा चुकी है। हर साल स्वास्थ्य विभाग इससे बचाव के लिए कार्ययोजना तैयार करता है, मगर नतीजा सिफर है। मौसम में बदलाव के साथ जिले में फिर से इंसेफेलाइटिस का कहर बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि इस बार इंसेफेलाइटिस पहले से भी भयावह स्थिति में है। जिला अस्पताल में शुक्रवार की सुबह तक सरिता, काजल, प्रिया, संगीता, मिनाक्षी व एक अन्य सहित इंसेफेलाइटिस के छह मरीज भर्ती थे। इसमें स्थिति को गंभीर देख डॉक्टरों ने मिनाक्षी को शुक्रवार की सुबह मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया।
अस्पताल के रिकार्ड पर गौर करें तो मार्च से अब तक 5 माह के दौरान जेई-एईएस के कुल 27 मामले जिला अस्पताल में आ चुके हैं, जिसमें से तीन की मौत हो चुकी है।मार्च से अब तक कुल 27 जेई व एईएस से पीड़ित मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिसमें तीन जिंदगी की जंग हार गए हैं। पांच को मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया है। 15 को ठीक होने के बाद छोड़ा गया है। यह आंकड़ा गत वर्ष की अपेक्षा अधिक है। वर्ष 2015 में अगस्त के प्रथम सप्ताह तक 22 मामले सामने आए थे।
जानकारों के अनुसार इसेंफेलाइटिस के लिए सबसे अधिक संवेदनशील माह सिंतबर और अक्टूबर माना जाता है। नवंबर शुरू होने के बाद ठंड शुरू होने के साथ इस असर धीरे-धीरे कम पड़ने लगता है, मगर सवाल यह है कि हर वर्ष सैकड़ों चलती-फिरती व खेलती जिंदगी की रफ्तार हमेशा के लिए थम जाती है।
जिम्मेदार इस बीमारी के रोकथाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ व आईसीयू प्रभारी डॉ. संजय चौधरी ने बताया कि इंसेफेलाइटिस के मरीजों के लिए जिला अस्पताल के आईसीयू में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विभाग अपने स्तर से मरीजों को हर संभव उपचार में लगा हुआ है। मौसम को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।