सिद्धार्थनगर। स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट बढ़ा दिया गया है। खुफिया एजेंसियों के अलर्ट के बाद सुरक्षा बल चौकस हो गए हैं। खुली सीमा के रास्ते अराजक तत्वों की घुसपैठ रोकने के लिए छह दिनों तक विशेष सैन्य अभ्यास और 24 घंटे चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा से गुजरने वाले हर वाहन और व्यक्ति की सघन तलाशी भी की जाएगी। चुनिंदा स्थानों पर सीसी टीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी रखी जाएगी।
नेपाल से लगती जिले की 68 किमी लंबी सीमा खुली होने के कारण अराजक तत्वों की घुसपैठ का खतरा बना रहता है। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर खुफिया एजेंसियों ने इस सीमा को अति संवेदनशील घोषित किया है। इसके बाद सीमा क्षेत्र में तैनात एसएसबी ने निगरानी कड़ी कर दी है। खुली सीमा पर चप्पे-चप्पे पर एसएसबी के जवान पेट्रोलिंग कर रहे हैं। बॉर्डर की ओर जाने वाले हर रास्ते, हर स्थान पर सघन चेकिंग करने व सीमा पार से आने वाले हर व्यक्ति पर पैनी निगाह रखने का निर्देश मिला है।
10 से 16 अगस्त चलने वाले विशेष जांच के दौरान सैन्य अभ्यास भी होगा। कुछ स्थानों पर गुप्त सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं, जो घुसपैठ को नाकाम करेंगे। बार्डर के पास लगे पिलरों के इर्द-गिर्द सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। इससे स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं होने पाए।
एसएसबी के पीआरओ ओपी साहू ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस को शांतिपूर्ण मौहाल में संपन्न कराने के लिए भारत-नेपाल की सीमा पर सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। सीमा पार से आने वाले हर व्यक्ति पर पैनी नजर रखने का निर्देश दिया गया है। संदिग्ध दिखने पर जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। जवान चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं।
भारत-नेपाल से लगने वाली 68 किलो मीटर की खुली सीमा पर संदिग्धों की घुसपैठ के कई मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2013 में भारत के मोस्ट वांटेड व लश्कर-ए-तैयबा के सह संस्थापक बम गुरु के नाम से चर्चित अब्दुल करीम उर्फ टूंडा की गिरफ्तारी उतराखंड में हुई, लेकिन पूछताछ में बढनी से सटे नेपाल के कृष्णानगर से उसके तार जुड़े मिले थे।
उसने नेपाल में रहकर अपने नेटवर्क चलाने के बारे में भी पूछताछ में कबूल किया था।उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही सीमा संवेदनशील घोषित कर दी गई और सीमा पर सतर्कता बढ़ा दिया गया था। देश में कहीं भी आतंकी घुसपैठ की सूचना के बाद भारत-नेपाल सीमा से सटेे बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश में कई स्थान अतिसंवेदनशील हैं, जहां से कुख्यात आतंकियों को पकड़ा जा चुका है।