भारत को चुनौती देते हुए ओली सरकार ने पिछले साल मई में लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को समायोजित कर नया नक्शा जारी किया था। उस नक्शे में भारत के कब्जे वाला यह हिस्सा गायब है। शुक्रवार को एक समारोह के बीच नेपाल में योगदान करने वाली विभूतियों को सम्मान स्वरूप नक्शे के आकार का जो मेडल दिया गया, उसमें अंकित नेपाल के नक्शे में भारत के यह क्षेत्र नहीं हैं।
शीतल निवास में यह मेडल राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की ओर से प्रदान किया गया। नए नक्शे में दार्चुला के कालापानी, लिपुलेक और लिंपियाधुरा शामिल था। नेपाल सोशल मीडिया में हुई आलोचना के बाद इसे सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारियों की लापरवाही की दृष्टि से देखा जा रहा है।
वहीं ओली सरकार ने कहा है कि वह भारत द्वारा जब्त की गई जमीन को वापस करने के लिए बातचीत कर रही है। पूर्व सचिव भीम उपाध्याय ने सरकारी पदक के नक्शे से भारत के कब्जे वाले क्षेत्र के गायब होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने इसे सरकार की ओर से गंभीर लापरवाही बताया।
गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव और प्रवक्ता चक्र बहादुर बूढा ने कहा कि पदक पिछले साल नक्शा जारी होने के पूर्व का है। उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्होंने वितरण किए गए नक्शे के आकार के मेडल को नहीं देखा वरना यह चूक नहीं होती। कहा कि पिछले साल जो पदक वितरित किया जाना था वह कोरोना के कारण रोक दिया गया था जिसे अब दिया गया। यह भी कहा कि 20 अप्रैल को बाकी छूटे हिस्सों के जुड़े नक्शे के साथ वितरित किए जाएंगे।
नेपाल के मानचित्र पर कालापानी, लिपुलेक और लिंपियाधुरा को शामिल करने के बाद, संविधान संशोधन विधेयक, जिसे इस मानचित्र को शामिल करने के लिए संविधान की अनुसूची तीन में संशोधन के लिए लाया गया था। 13 जून को प्रतिनिधि सभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित भी किया जा चुका है।