सरस्वती शिशु एवं विद्या मंदिर स्कूल में चैत्र प्रतिपदा के मौके पर शनिवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने नगर में पथ संचलन किया। लोगों को नववर्ष प्रतिपदा की बधाई देते हुए पाश्चात्य सभ्यता से सजग रहने का आह्वान किया। पथ संचलन में आरएसएस कार्यकर्ताओं का जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा से स्वागत किया।
कार्यक्रम में इटवा, बढ़नी, जोगिया, शोहरतगढ़ खंड के आरएसएस कार्यकर्ता व प्रबुद्ध लोग शामिल हुए। सरस्वती शिशु एवं विद्या मंदिर स्कूल में कार्यक्रम का शुभारंभ आरएसएस के सह प्रांत संघ चालक डॉ.पृथ्वीराज सिंह ने मां दुर्गा, प्रभु श्रीराम, सम्राट विक्रमादित्य व आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव हेडगवार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया।
बतौर मुख्य अतिथि डॉ. पृथ्वीराज सिंह ने कहा कि भारतीय नववर्ष का पहला दिन व महीना ऐतिहासिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रथम दिन सृष्टि का सृजन व पृथ्वी की उत्पत्ति हुई थी। भगवान राम का राज्याभिषेक व आरएसएस संघ की स्थापना करने वाले संघ के संस्थापक केशव हेडगेवार का जन्म हुआ था। इससे भारतीय इतिहास में हिंदी नववर्ष का प्रथम दिन व महीना का खास महत्व है। नववर्ष प्रतिपदा का यह पर्व भारत के छह प्रमुख पर्वों में से एक है।
इसके बाद स्वयंसेवकों का जत्था पथ संचलन के लिए विद्यालय परिसर से रवाना हुआ। सरस्वती स्कूल से स्वयंसेवकों का पथ संचलन गोलघर, भारत माता चौक, सोनारी मोहल्ला, प्रेम गली, नीबी दोहनी, पुलिस पिकेट, गड़ाकुल तिराहा से वापस सरकारी अस्पताल, नगर पंचायत कार्यालय होते हुए विद्यालय परिसर में पहुंचा।
इस दौरान जिला प्रचारक श्रीप्रकाश, नगर संघचालक बालमुकुंद वर्मा, प्रधानाचार्य अवधेश श्रीवास्तव, बढनी नगर संघचालक गोकुल, खंड कार्यवाह अजय, शिवपति पीजी कालेज के प्राचार्य डॉ आरपी सिंह, प्रबंधक शिवकुमार अग्रवाल, पूर्व प्रबंधक विपुल सिंह, हियुवा नेता सुभाष गुप्ता, शिक्षक संतोष मिश्र, अरुणेश मणि त्रिपाठी, ओमप्रकाश मिश्र, कृष्णदत्त शुक्ल, महेंद्र मिश्र, प्रधान प्रतिनिधि अभय सिंह, राममिलन त्रिपाठी, नगर कार्यवाह राकेश, दुर्गेश अग्रहरी, नंदू गौड़, संजय त्रिपाठी, किशोरीलाल गुप्ता, आशीष शुक्ल, सतीश मित्तल, बाबा रामउजागिर तिवारी, सौरभ गुप्ता, लालजी त्रिपाठी, पंकज सिंह, दीपू अग्रहरि, दिनेश मिश्र, रमेश कसौधन, संजय अग्रहरी, श्यामू कसौधन, राज मद्धेशिया, मोहित तिवारी आदि मौजूद रहे।