गेहूं की सिंचाई लिए पानी न मिलने से किसानों में हाय-तौबा मची है। सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित तो कर दिया पर सिंचाई के लिए खराब नलकूपों को अभी तक ठीक न कराने से किसानों में रोष बना हुआ है। किसानों ने नलकूप सही करवाने के लिए मुख्यमंत्री, सिंचाई मंत्री और डीएम को पत्र लिखा है।
बढ़नी विकास क्षेत्र के सीमाई क्षेत्र में किसान नलकूपों के सहारे ही खेती करते हैं। लाखों रुपये की लागत से ब्लाक के तुलसियापुर, बोहली, रौनिहवा, सिसवा, गडऱखा, परसा, औदही कलां में सिंचाई के लिए राजकीय नलकूप लगवाए गए थे। हालत यह है कि ज्यादातर नलकूप दशकों से खराब पड़े हैं।
देखरेख न होने से सिंचाई के लिए बनी नालियां पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। इन राजकीय नलकूपों की देखरेख व चलाने के लिए नियुक्त कर्मचारी भी केवल बैठकों में ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं। इन गांवों के ग्रामीणों ने कई बार विभाग के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी।
तुलसियापुर निवासी शैलेंद्र पांडेय का कहना है कि सूखा राहत के नाम पर सरकार किसानों की मदद करना चाहती है तो उसे क्षेत्र के विभिन्न गांवों में खेतों की सिंचाई के लिए बने नलकूपों को सही कराना चाहिए। राजकीय नलकूपों के कार्य न करने से किसानों को दो सौ रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई का खर्च देना पड़ रहा है।
महादेव बुजुर्ग निवासी अनवर सादात ने बताया कि सीमाई क्षेत्र में निजी पंपिंग सेट और सरकारी नलकूपों के अलावा गरीब किसान के पास सिंचाई का अन्य कोई साधन नहीं है।
वह भी कई सालों से खराब पड़े हैं। औदही कलां के वाजिद खान का कहना है कि नलकूपों की दशा सुधारने के लिए सरकार को विशेष पैकेज की व्यवस्था करानी चाहिए। परसा के ओंकार शुक्ल ने कहा कि नलकूप विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए हर खराब नलकूप को ठीक कराने की समय सीमा निर्धारित की जाए। क्षेत्र के रामानंद चौहान, लालसिंह चौधरी, विजय सिंह चौधरी, अजय सिंह, मो. हारुन और लक्ष्मीनिवास आदि ने प्रदेश के सीएम व डीएम को पत्र भेजकर अविलंब खराब नलकूपों को ठीक करवाने की है।
इस संबंध में नलकूप विभाग के एक्सईएन का कहना था कि बिजली समस्या के कारण कुछ नलकूप बंद हैं। सर्वे कराकर खराब नलकूपों को जल्द शुरू कराया जाएगा।