सिद्धार्थनगर। राम-सीता, श्रवण कुमार और श्रीकृष्ण-द्रोपदी जैसे आदर्शों से भरे समाज को यह क्या हो गया है। रिश्ते मर्यादा भूल रहे हैं। पत्नी, पति की कातिल हो गई है तो हवस की भूख पूरी न होने पर भाई, बहन को मौत के घाट उतार रहा है। कहीं बेटे ने मां की हत्या कर दी तो कहीं भतीजे ने पिता समान चाचा की। पिछले दो माह में ऐसी कई घटनाएं जिले में हुई हैं, जिसने न सिर्फ रिश्तों को शर्मसार किया है, बल्कि बुद्ध भूमि की साख को भी धूमिल कर दिया है।
हिमालय की तराई में स्थित यह वह भूमि है, जिसने पूरी दुनिया को दया, प्रेम और करुणा का संदेश दिया। शीतलता और शालीनता यहां की पहचान रही है। मगर तेजी से बदलते परिवेश में ऐसी सामाजिक दूरियां बन रही हैं कि हर रिश्ता विवादों में घिरता जा रहा है। बात चाहे पति-पत्नी के रिश्ते की हो या फिर भाई-बहन की।
हर पाक रिश्ता यहां कलंकित हुआ है। निहित स्वार्थों के लिए अपनों ने अपनों का ऐसा गला घोंटा है कि अब हर रिश्ते संदेह के घेरे में आ गए हैं। घर से बाहर तक लोग एक-दूसरे को सशंकित भाव से देख रहे हैं, जैसे सगा ही उनका दुश्मन बन रहा हो।