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Siddharthnagar News: खांसते-खांसते फूल रहा दम, तो गले में हो सकता हैं संक्रमण

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-सर्दी में चेस्ट ओपीडी में बढ़ रहे मरीज, बढ़ रही मुश्किल
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-सप्ताहभर लगाया जा रहा नेबुलाइजर, खानी पड़ रही एंटीबॉयोटिक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सर्दी में नजला, खांसी समेत बुखार होने पर मरीजाें की सांस फूल रही है। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह के बिना दवा खाने पर परेशानी और बढ़ रही है। कई दिनों से खांसी आने पर मरीजों के गले में संक्रमण हो रहा है। इससे उन्हें सांस लेने में भी कठिनाई हो रही है, जबकि अधिक खांसी वाले मरीजों में अस्थमा के भी लक्षण मिल रहे हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के मुताबिक जिन मरीजों की स्थिति गंभीर है, उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी के मुताबिक ठंड और प्रदूषण के चलते बच्चे और बुजुर्ग सर्वाधिक प्रभावित हैं। ओपीडी में सांस फूलने की समस्या लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों की जांच में गले में संक्रमण मिल रहा है।
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जिन लोगों को लगातार कई दिनों से खांसी आने पर सांस फूलने की समस्या हो रही है, ऐसे में कई को भर्ती करके नेबुलाइजर करना पड़ रहा है, जबकि कई मरीजों को हाई ऐंटीबाॅयोटिक्स देने पर राहत मिल रही है। इस समस्या की शुरुआत में ही अगर प्रभावी इलाज न हो तो यह क्रोनिक होने पर श्वास नलिका को अवरुद्ध कर दम घोंटने लगता है। ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा शरीर में न पहुंचने से भ्रम, उलझन, चिड़चिड़ापन, बीपी आदि कई शारीरिक समस्याएं होने लगती है। ऐसे में निजात के लिए नेबुलाइजर, एंटीबॉयोटिक्स दवा ही इलाज है। जिन मरीजों में अस्थमा के लक्षण हैं या सीने में बलगम जमा है, उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है।

बचाव के उपाय
-कोहरा, धुंध होने पर मास्क जरूर लगाएं
-गर्म कपड़ों से हाथ, पैर, कान को ढकें
-रात में यात्रा न करें। मौसमी फल, सब्जी खाएं
-अंगीठी, ब्लोअर चलाएं, लेकिन वेंटीलेशन जरूर रखें
-भोर और शाम को घर से न निकलें, गुनगुना पानी पीएं
- तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सक से परामर्श लें
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