संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सर्दी के मौसम में लोगों की दिनचर्या बदल रही है। ऐसे में दिल के मरीजों को और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। नवंबर शुरू होते ही तापमान में भी गिरावट आई है। सर्द हवाओं के साथ कोहरा भी बढ़ गया है।
इस कारण दिल के मरीजों एवं सांस की बीमारियों से ग्रसित मरीजों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। वहीं, इस मौसम में रक्तचाप बढ़ने के साथ दिल की धमनियां भी सिकुड़ जाती हैं, जिससे दिल में रक्त और ऑक्सीजन का संचार कम होने लगता है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ तो नहीं हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि ठंड में हृदय रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों को प्रतिदिन अपने बीपी की जांच कराते रहना चाहिए।
उन्होंने बताया कि ठंडे में ब्लड प्लेट्लेट्स ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं। इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए इस मौसम में दिल और उच्च रक्तचाप के रोगियों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुविधाएं न होने के बाद भी प्रतिदिन सात से आठ मरीज ओपीडी में आते हैं। जो हृदय रोग से संबंधित होते हैं।
उन्होंने बताया कि ठंड में हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से तापमान को बैलेंस करते रहने की कोशिश करता है। जब बाहर का तापमान कम होने लगता है, तो इसके हिसाब से शरीर को अपना तापमान सेट करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण बीएमआर (बेसल मेटाबोलिक रेट) बढ़ जाता है। बेसल मेटाबोलिक रेट शरीर के मेटाबॉलिज्म को मापता है। इसके अलावा सर्दियों के दौरान वाहिकाओं में संकुचन की समस्या भी बढ़ जाती है।
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