सीमावर्ती क्षेत्र के गरीबों पर मानव तस्करों की नजर
बेहतर जीवन का सपना दिखाकर जाल में फंसा रहे तस्कर
एक माह में मानव तस्करी के आ चुके हैं कई मामले
एक व्यक्ति के तस्करी में तीन लोगों का होता है रोल
तस्करी रोकने में स्थानीय प्रशासन और एनजीओ हैं विफल
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे सीमावर्ती गांव के गरीब परिवारों पर मानव तस्करों की नजर है। तस्कर बेहतर जीवन का सपना दिखाकर उनकी खरीद-फरोख्त करने का काम कर रहे हैं। बीते एक माह के भीतर सीमाई क्षेत्र मेें मानव तस्करी के कई मामले आ चुके हैं। मगर इन तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में स्थानीय प्रशासन और समाज को आईना दिखाने का काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाएं विफल नजर आ रही हैं जो चिंताजनक है। देश में कई प्रकार के तस्करी के मामले आते रहे हैं। मगर इस समय दुनिया की सबसे तीन बड़ी तस्करी में मानव तस्करी शामिल है। इसमें मानव तस्करी में देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूरी के साथ-साथ भीख मंगाने और अंग प्रत्यारोपण जैसे अपराध शामिल हैं।
मानव तस्कर ऐसे परिवार को अपने जाल में फंसा रहे हैं जो गरीब हैं और उनके सामने भोजन और रोजगार का भी संकट है। इन दिनों मानव तस्करों के निशान पर नेपाल का सीमाई क्षेत्र है। बीते एक माह के भीतर कई मामले आ चुुके हैं। ये वे मामले हैं, जिनमें सीमा पर एसएसबी के जवानों द्वारा मानव तस्करों को पकड़ा गया है। शुक्रवार की देर शाम भी एसएसबी जवानों ने एक नेपाल के नाबालिग लड़के साथ दो तस्करों को दबोचा। जो लड़के को अच्छा रोजगार दिलाने झांसा देकर सीमापार से ला रहे थे। पकड़े गए तस्करों की पहचान मो. रियाज और मनोज निवासी मौवारी थाना परसा, जिला रूपनेदही के रूप में की गई। बच्चे को नेपाल पुलिस को सुपुर्द किया गया है। उन्हें ककरहवा से पकड़ा गया। इससे पहले 24 जनवरी को भी ककरहवा बॉर्डर से एक नेपाली लड़के को मानव तस्करों के चंगुल से एसएसबी जवानों ने आजाद कराया गया था। वह भी नेपाल का ही रहने वाला था। इससे पूर्व में भी मानव तस्करी से जुड़े कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। इसके पीछे काम करने वाले रैकेट को तोड़ने मेें स्थानीय प्रशासन विफल साबित हो रहा है। इस संबंध में एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार ने बताया कि मानव तस्करी से जुड़े मामलों को लेकर एसएसबी गंभीर है। सीमा पर से हर आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। संदिग्ध दिखने वालों से पूछताछ की जाती है। कई बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से आजाद कराया गया है। वहीं, एसपी विजय ढुल ने बताया कि मानव तस्करी को रोकने के लिए अभी हाल ही में बैठक हुई थी। इस संबंध में सीमावर्ती थानों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्य संस्थाओं को भी निर्देश दिए गए है।
तीन चरणों में काम करते हैं तस्कर
हाल ही में मानव तस्करी के में पकड़े गए बच्चों से जब जानकारी ली गई तो यह बात सामने आई कि रोजगार दिलाने के लिए परिवार को अपने झांसे में एक व्यक्ति लेता है। जब परिवार तैयार हो जाता है तो बच्चे को ले जाने का काम दूसरा व्यक्ति करता है। इसके बाद सीमा पार कराने के बाद साथ में तीसरा व्यक्ति जाता है। उसके पास सारे कागजात तैयार रहते हैं। पुलिस विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि इसके पीछे उनका उद्देश्य है कि कोई पकड़ा न जाए। इसमें एक-दूसरे से किसी की पहचान नहीं होती है। बस रुपये के लिए सभी काम करते हैं।
पुलिस विभाग मेें बनी है अलग इकाई
मानव तस्करी की घटनाओं को रोकने और इस कार्य में लिप्त लोगों को पकडने के लिए जिला अस्पताल एएचटीयू की इकाई गठित है। इनका काम है किेे मानव तस्करी के मामलों की जांच करें। पकड़े जाने पर कार्रवाई करें। साथ ही अगर नाबालिग मिलता है तो उसे समाज सेवा से जुड़ी संस्थाओं को सुपुर्द करें।
मानव तस्कर गिरफ्तार, तीन बालक सुरक्षित
सिद्धार्थनगर/बर्डपुर। एसएसबी 43वीं वाहिनी की सीमा चौकी ककरहवा के जवानों ने रविवार की देर शाम चेकिंग के दौरान सीमा पर स्थित पिलर संख्या 544/36 के पास से मानव तस्करों के चंगुल से तीन बच्चों को आजाद कराया। एसएसबी के जवान रविवार की देर शाम सीमा पर गश्त पर थे, इसी दौरान एक संदिग्ध को तीन बच्चों के साथ देखा गया। रोककर पूछताछ में उसकी पहचान सलमान खान गांव सेकुवाधाध थाना लुंबिनी जिला रूपनदेही नेपाल के रूप में की गई। सीमा चौकी ककरहवा के समवाय प्रभारी व नेपाल पुलिस की संयुक्त पूछताछ से पता चला कि मानव तस्कर नाबालिग लड़कों को बहला-फुसलाकर पैसे व नौकरी का झांसा देकर उनके घरवालों को बिना बताए ककरहवा बॉर्डर से मुंबई के चिमबऊर ले जाने वाला था लेकिन पकड़ा गया। जांच-पड़ताल के बाद पीड़ित नाबालिग लड़कों के साथ मानव तस्कर को नेपाल पुलिस चौकी कालीदह जिला रूपनदेही नेपाल के सुपुर्द कर दिया गया।