सकारपार। क्षेत्र में लगातार घटते बाग-बगीचों और पेड़-पौधों की संख्या का असर अब मौसम और पर्यावरण पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़ों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि गर्मी से राहत पाने के लिए लोग एसी, कूलर और पंखों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले तक गांवों के आसपास आम, महुआ, जामुन और कटहल के बड़े-बड़े बाग हुआ करते थे। इनसे वातावरण में ठंड बनी रहती थी और लोगों को शुद्ध हवा मिलती थी। गर्मी के दिनों में किसान और राहगीर पेड़ों की छांव में आराम कर लेते थे लेकिन अब अधिकांश बाग-बगीचे समाप्त हो चुके हैं या उनकी जगह निर्माण कार्य हो गए हैं।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि हर वर्ष पौधारोपण अभियान तो चलाए जाते हैं लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो जाते हैं। यदि पौधारोपण के साथ उनके संरक्षण पर भी गंभीरता से काम किया जाए तो पर्यावरण संतुलन को बेहतर बनाया जा सकता है।
भीषण गर्मी के चलते दोपहर में बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। कटौती होने पर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
क्षेत्र के बृजेश चौबे, राम प्रकाश त्रिपाठी, सूर्यनाथ, सुनील पांडेय, हरिराम, सुरेंद्र और महेश प्रसाद सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से व्यापक पौधरोपण अभियान चलाने, पुराने बाग-बगीचों को संरक्षित करने और अवैध कटान पर रोक लगाने की मांग की है।